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Saturday, January 24, 2026

नानी कहती थीं...


नानी कहती थीं कि बिटिया 
कुछ बातों के बारे में लोग बात करेंगे नहीं 
कुछ बातों के बारे में बात कर नहीं पाएंगे   
और जिन बातों के बारे में बात करेंगे  
वो लगभग निरर्थक होंगी 
जो बातें निरर्थक होंगी 
वो सबसे ज्यादा सुनी जायेंगी।  

सबसे पीड़ित व्यक्ति 
अपनी पीड़ा की बात नहीं सुनेगा 
उसके सामने दूसरे की पीड़ा को 
मनोरंजन बनाकर परोस दिया जायेगा  
वो अपनी भूखी अंतड़ियों को 
बांधकर
हिंसा के दृश्यों में उगाये गए 
आनंद के सागर में गोते लगाएगा।   

वो यह नहीं समझ पाएगा कि वो जो दूसरा है 
जिसकी पीड़ा में ढला मनोरंजन उसे 
गुदगुदा रहा है 
वो और कोई नहीं, वो खुद है 

नानी कहती थीं  कि 
देखना, बाज़ार में सबसे ज्यादा दुख बिकेगा 
लेकिन दुख टिकेगा नहीं 
दुख की कमी सरकार पड़ने नहीं देगी 
दुख को मनोरंजन में बदलने का काम 
संसद तक जा पहुंचेगा। 

देखना एक दिन मनुष्य की पीड़ा चुटकुला हो जाएगी 
और चुटकुला सुनते हुए लोगों को देखना दुख होगा। 

नानी कहती थीं...  

Wednesday, March 26, 2025

मनोकामिनी सा मन



बीतती नहीं वो रात 
जब आसमान झील में औंधा पड़ा था 
और जुगनू हमारे साथ 
झील में पड़े सितारों से बतिया रहे थे 

हवाओं में एक खुनक थी 
और तुमने मेरी देह पर 
ख़ामोशी की चादर लपेट थी 

तुम्हारी आँखों से सारा अनकहा 
मनोकामिनी की ख़ुशबू सा झर उठा था 
झील की सतह पर हवाएँ नृत्य कर रही थीं 
जैसे नृत्य करती है स्त्री की अभिलाषा 

हमने साँसों के सम पर मुस्कुराहटें पिरो दीं थीं 
सितारों भरा आसमान 
आसमान काँधों से आ लगा था

कोई तारा टूटने नहीं दिया तुमने उस रोज 
कि हर ख़्वाब को आहिस्ता से सहेज लिया 

इन जिये हुए लम्हों ने दुनिया संभालने की ताक़त दी है 
इन उम्मीद भरे लम्हों ने मज़लूमों का साथ देने 
और मगरूर शासक से आँख मिलाने की हिम्मत दी है 

हाँ, प्रेम जरूरी है दुनिया को सुंदर बनाने के लिए 
इंसानियत में आस्था बनाए रखने के लिए। 

Monday, March 24, 2025

जिद्दी हवाओं के गीत



झील में डुबकी लगाकर आई हवाओं में 
कोई बेफिक्री तारी थी 

देर रात की जाग 
हवाओं की आँखों की चमक थी 

उन्हें न सूरज से निस्बत 
न पहाड़ से, न जंगल से 
उन्हें बस हमारे करीब आना था 
हम दोनों के बीच ही बैठना था 
हम दोनों का हाथ थामना था 
उन्हें हमारी सुबह की चाय में 
किसी जादू सा घुल जाना था 

वो जिद्दी हवाएँ थीं 
सुबह बीत जाने के बाद भी 
अपनी पूरी धज से इतरा रही हैं 

उन जिद्दी हवाओं की खुशबू 
रोज एक गीत लिखती है 
कि दुनिया एक रोज 
सबके जीने के लायक होगी 
न कोई हिंसा होगी, न कोई नफरत 

उन गीतों को 
एक ख़्वाबिदा सी लड़की 
रोज गुनगुनाती है 
सूरज की किरणें उन गीतों को 
लाड़ करती हैं 

तुम मेरा माथा चूमते हो 
और धरती आश्वस्ति की धुन पर 
झूम उठती है। 

Saturday, March 22, 2025

हम मिलेंगे


 हम मिलेंगे 
जब सूरज डूबा नहीं होगा 
और साँझ 
नदी में झिलमिलाते दिन की परछाईं 
एकटक देख रही होगी 

हम मिलेंगे जब नफ़रतें 
अपना सामान समेटकर जाने को होंगी 
और दुनिया के सारे रास्ते 
इश्क़ गली की ओर मुड़ रहे होंगे 

हम मिलेंगे 
जब शाखें उम्मीदों से भर उठेंगी 
तारों भरा आसमान 
हथेली पर उतर आएगा 
और तुम सप्तऋषि मण्डल को 
मेरे माथे पर सजाते हुए कहोगे 
कि देखो पल भर को ही सही 
हमारे प्यार ने 
दुनिया को सुंदर बना तो दिया है। 

गुजराती अनुवाद- 
|| આપણે મળીશું ||
આપણે મળીશું
જ્યારે
સૂર્ય હજુ ડૂબ્યો નહીં હોય
અને સાંજ
નદીમાં ઝબકતા દિવસના ઓળા
એકીટશે નિહાળતી હશે
આપણે મળીશું
જ્યારે નફરત પોતાનો સામાન સંકેલીને જવામાં હશે
અને દુનિયાના બધાં રસ્તા
પ્રેમ - ગલી તરફ વળતાં હશે
આપણે મળીશું
જ્યારે શાખાઓ આશાઓથી લચી પડી હશે
તારા - ખચિત આકાશ
હથેળીમાં ઉતરી આવ્યું હશે
અને તું
સપ્તર્ષિ - મંડળને મારી સેંથીમાં પૂરીને કહીશ
' જો, ભલે પળવાર માટે હો
પણ આપણા પ્રેમથી
દુનિયા સુંદર બની તો ખરી ને ! '
- પ્રતિભા કટિયાર
- હિન્દી પરથી અનુવાદ : ભગવાન થાવરાણી

Wednesday, September 11, 2024

कुछ लड़कियां, बहुत सारी लड़कियां


फोटो क्रेडिट-गूगल 

कुछ लड़कियां खूब पढ़ रही हैं
कुछ लड़कियां अच्छे ओहदों पर पहुँच रही हैं
कुछ लड़कियां अपने हकों के लिए लड़ रही हैं
कुछ लड़कियां कवितायें लिख रही हैं
कुछ लड़कियां डरती नहीं किसी से
कुछ लड़कियां पार्टी कर रही हैं
कुछ लड़कियां खुलकर हंस रही हैं
कुछ लड़कियां प्यार में हैं

कुछ लड़कियों को देख लगता है
अब लड़कियों की दुनिया बदल चुकी है
उनकी दुनिया का अंधेरा मिट चुका है

लेकिन अभी भी बहुत सारी लड़कियां
पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहीं
जूझ रही हैं अपनी पसंद के विषय की पढ़ाई के लिए,
आगे की पढ़ाई के लिए
बहुत सारी लड़कियां
अपनी पसंद के रिश्तों के सपने से भी बाहर हैं
बहुत सारी लड़कियां पूरी पढ़ाई करके भी
जी रही हैं अधूरी ज़िंदगी ही
बहुत सारी लड़कियां पैसे कमा रही हैं
लेकिन नहीं कमा पा रही हैं अपने हिस्से के सुख 
बहुत सारी लड़कियां उलझी हुई हैं
साज-शृंगार में, तीज त्योहार में
बहुत सारी लड़कियां
एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी की जा रही हैं
बहुत सारी लड़कियां अन्याय को सह जाने को अभिशप्त हैं
कुछ लड़कियों और बहुत सी लड़कियों के बीच एक लंबी दूरी है
कुछ लड़कियों के बारे में सोचना सुख से भरता है
लेकिन हक़ीक़त की धूप हथेली पर रखे इस जरा से सुख को
पिघला देती है

कुछ लड़कियों के चेहरे बहुत सारी लड़कियों जैसे लगने लगते हैं
‘अब सब ठीक होने लगा है’ का भ्रम टूटने लगता है
कि ज्यादा नुकीले हो गए हैं
स्त्रियों की हिम्मत को तोड़ने वाले हथियार
ज्यादा शातिर हो गयी हैं
उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की साजिशें
झूठ की पालिश से खूब चमकाए जा रहे हैं मुहावरे
कि अब सब ठीक ठाक है...

जबकि असुरक्षा के घेरे से बाहर न ये कुछ लड़कियां हैं
न बहुत सारी लड़कियां।

Tuesday, July 23, 2024

मौसम बने हैं डाकिया



एक रोज लड़की ने रेगिस्तान में बोयी
इश्क़ की बारिश
पीले कनेर भर उठे बूंदों से
और धरती को लग गए पंख

एक रोज नदियों ने गुनगुनाए
कश्तियों के गीत
और मुसाफिरों ने जानबूझकर
गुमा दिये रास्ते

एक रोज दुनिया भर की सेनाओं ने
गुमा दिये सारे हथियार
और सरहदों पर उगाये
सफ़ेद फूल

एक रोज लड़के ने
लड़की के माथे पर टाँक दिया चुंबन
दुनिया सुनहरी ख्वाबों की आश्वस्ति से
भर उठी

एक रोज दुनिया भर की किताबें
प्रेम पत्रों में बदल गईं
और सारे मौसम बन गये डाकिये

इस दुनिया को ख़्वाब सा हसीन होना चाहिए....



Wednesday, March 6, 2024

उम्मीद




एक रोज जरा सी लापरवाही से
उम्मीद के जो बीज
हथेलियों से छिटक कर 
बिखर गए थे

सोचा न था
कि वो इस कदर उग आएंगे
और ठीक उस वक़्त थामेंगे हाथ
जब मन काआसमान
डूबा होगा घनघोर कुहासे में

डब डब करती आँखों के आगे
वादियाँ हथेलियाँ बिछा देंगी
और समेट लेंगी आँखों में भरे मोती सारे

स्मृतियों में ठहर गए गम को
कोई पंछी अपनी चोंच से
कुतरेगा धीरे-धीरे

जब कोई सिहरन वजूद को घेरेगी 
मौसम अपने दोशाले में लपेटकर
माथा चूम लेगा

उगता हुआ सूरज
मुश्किल वक़्त को मुस्कुराकर देख रहा है...

Monday, January 8, 2024

आने से ज्यादा जरूरी है आने की इच्छा

ओ जानाँ,
तुम्हारा आकर जाना 
मुझे प्रिय है 
कि छूट जाती है एक ख़ुशबू तुम्हारे पीछे 
जो डोलती-फिरती है मरे दायें बायें 
तुम्हारे जाने के बाद, 
जैसे तुम डोलते फिरते हो 
आने के बाद. 

तुम्हारे जाने में 
वो जो फिर से आने की
आहट होती है न, 
जैसे कोमल गंधर्व लगा हो मालकोश का

जाकर जोऔर क़रीब आ जाते हो तुम,
वो जो लगता है इंतज़ार का मद्धम सुर,
जो ख़्वाहिशों की पाज़ेब
छनकती रहती है हरदम, 
वो जो जूही की डाल सी 
महकती रहती है मुस्कुराहट
वही जीवन है
वही प्रेम है

हाँ, तुम्हारा आना ज़रूरी है
लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है 
आने की इच्छा का होना.
मेरे लिये वो इच्छा प्रेम है.

अगर ज़िंदगी के रास्तों पर चलते हुए 
कोई हाथ थामना चाहे तो 
रोकना मत ख़ुद को. 
बस जब बीते लम्हों का ज़िक्र आये 
तो मुस्कुराना दिल से 
मेरे लिये यही प्रेम है.

Saturday, November 4, 2023

मैंने प्यार किया


प्यार किया तुम्हें
जैसे मिट्टी करती है
बीज से प्यार
और अंकुरित होता है एक पौधा

प्यार किया तुम्हें
जैसे राहगीर करता है
रास्तों से प्यार और
भर लेता है झोलियों में सफर

प्यार किया तुम्हें
जैसे सूरज करता है
धरती से प्रेम
और शरद की दुपहरी
जगमगा उठती है

प्यार किया तुम्हें
जैसे पूस की ठिठुरती रात में
अलाव से करती हैं प्यार
ठिठुरती हथेलियाँ
समेटती हैं ज़िंदगी में भरोसे की ऊष्मा.

Monday, September 4, 2023

हमकदम

एक रोज
ढलती शाम के समय
समंदर के किनारे
हमने अपने कदमों
के निशान भर
नहीं बोये थे
बोयी थी उम्मीद
कि दुनिया में
सहेजी जा सकती है
प्रेम की ख़ुशबू।

Tuesday, August 29, 2023

सुख का स्वाद



सुख का स्वाद
उस वक़्त पता नहीं चलता
जब वह घट रहा होता है

वह पता चलता है
घट चुकने के बाद

जीभ पर टपकता है
बूंद-बूंद
धीमे-धीमे
मध्धम-मध्धम 
राग हंसध्वनि की तरंग सा

जैसे मिसरी की डली
घुल रही हो
जैसे नाभि से फूट रही हो कोई ख़ुशबू.
जैसे बालों में अटका हो
बनैली ख़ुशबू से गुंथा
एक फूल।

Thursday, July 20, 2023

खिड़की भर नहीं है आसमान



एक खिड़की थी छोटी सी
एक आसमान था बड़ा सा
लड़कियों को सिखाया गया
खिड़कियों को सजाना-संवारना
उस सजी धजी खिड़की से 
आसमान को देखना
और इतने से ही खुश हो जाना
खुशक़िस्मत समझना ख़ुद को
कि उनके पास खिड़की है तो कम से कम 

उन्हें शुक्रिया कहना सिखाया गया
घर देने वाले का
ताकि वो उसे सजाती-संवारती रहें
खिड़की देने वाले का
जिसमें वो एक टुकड़ा
आसमान थोड़ी सी बूँदों की झालर
लगाती रहें
लोग कहते रहें
कितना सुंदर घर सजाती हो

लड़कियों को खिड़कियाँ और दीवारें लांघकर
बाहर जाना नहीं सिखाया गया
उन्हें नहीं बताया गया 
कि आसमान सिर्फ़ देखने के लिए नहीं होता
उड़ान भरने के लिए होता है.

लड़कियों ने खुद ही सीख लिया एक रोज़
बिना दीवारों वाला घर बनाना
आसमान सिर्फ़ देखना नहीं
उसमें ऊँची उड़ान भरना भी 
 
अब वो सिर्फ़ घर, दहलीज़ 
और खिड़कियाँ नहीं सजातीं 
पूरी दुनिया को सुंदर बना रही हैं
अपनी मुस्कुराहटों से भी 
और अपने प्रतिरोध से भी.