पाठकीय प्रतिक्रियाओं को मैं सार्वजनिक नहीं करती, उनके नेह में भीग लेती हूँ, दिल में सहेज लेती हूँ. लेकिन कहानी 'बकरियां जात नहीं पूछतीं' कहानी पर मिली यह प्रतिक्रिया चूंकि सार्वजनिक मंच पर मिली तो इसे यहाँ सहेज रही हूँ. दिल प्रेम से भरा है. पाठक ही बताते हैं कि हम लिखने के तौर पर सही रास्ते पर जा भी रहे हैं या नहीं. सुंदर चूंकि शिक्षक भी हैं इसलिए उनकी प्रतिक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो जाती है इसलिए कि वो इस कहानी के मर्म के ज्यादा करीब पहुँच पाए. शुक्रिया सुंदर भाई!