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Wednesday, January 27, 2010

टोहते

पारुल की दुनिया में गयी तो कुछ लाइनों में अटक ही गयी...
सो उस अटकन से निकलने के लिए पारुल के ब्लॉग से कुछ
बूँदें ले आई अपनी दुनिया में...मांगकर...शुक्रिया पारुल!


चाहें तो
रुख कर लें
अपनी-अपनी देहरियों का
चाहे तो
भटकन ही बना लें
शेष जीवन का उद्देश्य
जो भी हो,
जो भी
पर तय कर लें
कर लें सुनिश्चित
क्योंकि जीवन में
इत्मीनान बहुत $जरूरी है...
......
....
...
बरसों बाद खुद को टोहते
अपने निपट
एकाकीपन में जाना कि
तुम्हारे साथ
तुम्हारे बिना जीने से
अधिक प्रीतिकर रहा
तुम्हारे बिना तुम्हारे साथ जीना...
-पारुल

पारुल के ब्लॉग का लिंक-
http://parulchaandpukhraajkaa.blogspot.com/