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Friday, August 16, 2024

तुम्हारे खयाल में, देर रात तक



...और मैं सफर में थी। चुप रहने की शदीद इच्छा और उस चुप रहने में ही थोड़ा सा किसी से बतिया लेने की इच्छा के बीच कुछ अटका हुआ, कुछ ठिठका हुआ सा। अकेलापन इस कदर आकर्षक, किसी जादू की तरह होता है कि इसे हर हाल में टूटने से बचा लेने के लिए हम जुटे रहते हैं। यह इतना नाज़ुक होता है कि जरा सी आहट से दरकने को बेताब रहता है।

सफर शुरू हुआ तो दिन बीतने को था और शाम, सिंदूरी ओढ़नी पहनकर इतराते हुए अपनी छोटी सी ड्यूटी पर आने को तैयार थी।

मैंने किताब ‘देर रात तक’ उठाई थी। ‘देर रात तक’ गौरव गुप्ता की किताब है। न कहानी, न कविता, सी यह किताब। किताब के कुछ पन्ने पहले ही पलट चुकी थी तो मुझे लगा सफर में यह जो चुप रहने और बिना चुप्पी को तोड़े किसी से बतिया लेने की इच्छा शायद इस किताब को पढ़ते हुए पूरी हो जाएगी। अंदाजा ठीक निकला। बाहर आसमान में चाँद उग रहा था यह सोचते हुए मैंने बगीचे में मोगरा मुस्कुरा रहा होगा को याद किया और पन्ने पलटे। किताब में बोगेनबेलिया की शाख हिलती हुई मिली। बारिश के बाद शाखों पर छूट गई बूंदों ने मानो चेहरे पर नर्म मुस्कुराराहट उकेर दी।

इस लिखावट में प्रेम है, और प्रेम ही तो जीवन है। जीवन के तमाम रंगों को बेहद खूबसूरत ढंग से गौरव ने इन प्रेमिल नोट्स में सहेजा है। जैसे उन्होंने अपनी उस रात को पाठकों के साथ साझा कर लिया हो जिसमें, महमूद दरवेश हैं, रिल्के हैं, काफ़्का हैं, ओशो हैं, वॉन गाग हैं, विनोद कुमार शुक्ल हैं, निर्मल हैं और मानव कौल हैं। इन सोहबतों में किसी छूटे हुए या छूट गए से लग रहे प्रेम की परछाईयां हैं, चाय है, मौसम हैं। उदासियों की ख़ुशबू है, उम्मीदों की कोंपलें फूटने की आवाज़ है।

देर रात तक...पढ़ते हुए महसूस होता है कोई चुपचाप आकर बगल में बैठ गया हो जैसे और सांस तनिक हल्की हुई हो। जैसे रूमानियत का धीमा संगीत Keeny G की संगत में खिल रहा हो।

गौरव अपनी सोहबतों के असर में हैं, उस असर से बेज़ार भी नहीं। वो लिखते हैं वैसा जैसा महसूस करते हैं बिना किसी अतिरेक के बिना किसी बनावट के। यही इस किताब का सौंदर्य है।

किसी भी पन्ने को कभी-कभी पलटा जा सकता है, थोड़ा सा पढ़कर देर तक चुप रहा जा सकता है। मुझे इस लिखे में एक लंबी खामोशी दिखती है जिसकी बोल बोलकर थक चुकी इस दुनिया को बड़ी जरूरत है। इस लिखे में मानव का बीच-बीच में दिख जाना चौंकाता नहीं एक अपनेपन से भरता है। गौरव को ढेर सारी शुभकामनायें देते हुए खुश हूँ और उम्मीद से भरी हूँ।