Thursday, April 16, 2026

अप्रैल उम्मीद है


वो जो खिलखिला रहे हैं मोगरे इन दिनों
ये अप्रैल की आहट है
ये जो सारे दरवाजे खिड़की भेदकर 
चली आती है रातरानी की ख़ुशबू 
ये अप्रैल का दीवानापन है 
ये जो आँखों से निकल भागे हैं ख़्वाब 
मटरगश्ती करते फिर रहे हैं यहाँ से वहाँ 
ये अप्रैल की शरारत है 
ये जो समन्दर की लहरों को 
अंजुरियों में समेट लेने को व्याकुल है एक लड़की 
ये अप्रैल पर भरोसा है 
ये उड़ते हुए सेमल के फाहे 
आ बैठे हैं काँधों पर 
ये अप्रैल से उम्मीद है 

1 comment:

Anita said...

अप्रैल का आना अर्थात उम्मीद के फूलों का खिल जाना, बहुत सुंदर रचना