दूधिया रौशनी के झरने ने
भर लिया आलिंगन में
पीपल की पत्तियों सा
घना होता गया मौन
हरियाली के मैदान में
कुलांचे भरने लगा हृदय
कैक्टस फूलों से भर उठे
मुस्कुराने लगे बबूल के फूल
रात अमावस की थी लेकिन
एक जरा थामना भर था अपना हाथ
रौशनी ही रौशनी बिखरने लगी.
भर लिया आलिंगन में
पीपल की पत्तियों सा
घना होता गया मौन
हरियाली के मैदान में
कुलांचे भरने लगा हृदय
कैक्टस फूलों से भर उठे
मुस्कुराने लगे बबूल के फूल
रात अमावस की थी लेकिन
एक जरा थामना भर था अपना हाथ
रौशनी ही रौशनी बिखरने लगी.



