Tuesday, December 6, 2022

मैं तो प्यार हूँ


मेरा क्या है
मैं तो सितारों से बात कर लूंगी
चाँद को सुना दूँगी दिल की तमाम बातें
मैं किरणों को गले से लगा लूंगी
राह चलते मिले पत्थरों के
सीने से लगकर रो लूँगी
नदियों की रवानगी में बहा दूँगी
अपनी ऊर्जा की कलकल करती तासीर

मेरा क्या है 
मैं तो गेहूं की बालियों के संग
उगते खर-पतवार के संग उग आऊंगी
बिल्लियों के बच्चों को गोद में लेकर खिलखिला लूंगी
पलट कर देखूंगी तुम्हें
और आगे बढ़ जाऊंगी 
हिमालय की दिपदिप करती पहाड़ियों की ओर
जंगली फूलों को बालों में लगाकर झूम उठूँगी
सराबोर होउंगी बेमौसम बरसातों में भी
और हरारत होने पर खा लूंगी पैरासीटामाल

तुम्हारा जाना
तुम्हारे जीवन में क्या लाएगा नहीं जानती
मेरा क्या है
मैं तो प्यार हूँ
मुस्कुराऊंगी और धरती मुस्कुरा उठेगी...

8 comments:

Onkar said...

सुन्दर रचना

yashoda Agrawal said...

शानदार रचना
सादर

आतिश said...

मोहब्बत ! एक अजीब सी क़शमकश ...
संभावनाओं का भण्डार ... संकेतों कि नदी और ख्यालों का समन्दर ... शीतल पुरवाई और वे वक्त का आंधी तुफान ... सब होता है ... नहीं होती तो वस .. सामने वाले को इसकी ख़वर नहीं होतीं / /

सचमुच आपने हर उस मन को छुआ होगा जिसने कभी - न - कभी " मोहब्बत " किया होगा / /
धन्यवाद् ! बिछड़े पल से पुन: मिलवाने के लिये ...
सुन्दर ! अति सुन्दर रचना / /

कविता रावत said...

यदि कोई हर हाल में खुश रहने की कला सीख गया तो फिर सुकून उससे दूर नहीं रहता
बहुत सुन्दर

Sudha Devrani said...

प्यार मे सब सम्भव !
बहुत सुंदर सृजन
वाह!!

Sudha Devrani said...

..

रेणु said...

वाह! प्रेमरत हृदय के विराट अस्तित्व का कोई ओर ना छोर! ये कहाँ नहीं! ये निर्बंध है, कल-कल बहती नदी की निर्मल धार-सा! ।उन्मुक्त प्यार की अत्यंत भाव-पूर्ण अभियक्ति आदरणीया!!! एक मनमोहक रचना के लिए बधाई और शुभकामनाएं/

muhammad solehuddin said...

अच्छी जानकारी !! आपकी अगली पोस्ट का इंतजार नहीं कर सकता!
greetings from malaysia
द्वारा टिप्पणी: muhammad solehuddin
let's be friend