Wednesday, November 22, 2023

बाल्की की चुप पर चुप्पी क्यों रही


चुप 2022 में रिलीज हुई थी। इत्तिफ़ाक से मैंने कल देखी। चूंकि क्राइम मेरा जॉनर नहीं है और यह फिल्म एक सीरियल किलर के बारे में है इसलिए सजेशन लिस्ट में यह काफी दिन से पड़ी हुई थी। कल देखनी शुरू की तो लगा क्यों इतने दिन नहीं देखी। वो जो होती है न क्रिएटिव भूख वो पूरी हुई इस फिल्म से। आर बाल्की का यह काफी सुंदर काम है। पता नहीं इस पर बात क्यों नहीं हुई।
 
फिल्म फिल्म की दुनिया के बारे में है। फिल्म फिल्म के रिव्यू के बारे में हैं। कई लेयर्स में बहुत सारी कमाल बातें करती है। फिल्म की नायिका जो कि मीडिया में काम करती है, एक नॉर्मल बातचीत में अपनी दोस्त से कहती है, 'जिस फिल्म के रिव्यू बहुत अच्छे होते हैं, खूब स्टार मिलते हैं अक्सर वो फिल्म मुझे अच्छी नहीं लगती और जिसे क्रिटिक नकार देते हैं मुझे लगता कि यह फिल्म मुझे पक्का अच्छा लगेगी और ऐसा अक्सर सच ही होता।' मैंने इस बात से खुद को रिलेट कर पा रही थी। 

फिल्म की कहानी फिल्म रिव्यू करने वालों के बारे में है। कैसे किसी फिल्म को रिव्यू बनाते हैं, बिगाड़ते हैं। एक दृश्य में हीरो कहता है 'तुमने फिल्म को 1 स्टार दिया तो कोई बात नहीं लेकिन इसकी वजह तो ठीक बताती न कि यह फिल्म कहाँ की कॉपी है, उसकी असल कमजोरी क्या है। यही दिक्कत है, जानते नहीं हो तुम लोग और कुछ भी बोल देते हो, लिख देते हो...'कागज के फूल' गुरुदत्त, फिल्मों से प्यार, फिल्मों की समझ, नासमझ इन सबके बीच ट्यूलिप के फूल, चाँदनी रात, बरसात और रोमांस को गूँथते हुए एक सीरियल किलर ड्रामा को आर बाल्की बहुत अच्छे से लेकर आए हैं।

सनी देयोल को हैंडपंप उखाड़ने वाले अवतार से अलग देखना अच्छा लगा। मैं तो जबसे फिल्म देखी है फिल्म के असर में हूँ।

3 comments:

विकास नैनवाल 'अंजान' said...

रोचक। आर बाल्की फिल्में अलग बनाते हैं। यह फिल्म जब आई थी तो सोचा था देखा जाएगा लेकिन फिर रह गया। जल्द ही देखने की कोशिश रहेगी।

Onkar said...

बहुत सुंदर

Anonymous said...

अभी नहीं दिल्ली देखती हूं