Saturday, November 4, 2023

मैंने प्यार किया


प्यार किया तुम्हें
जैसे मिट्टी करती है
बीज से प्यार
और अंकुरित होता है एक पौधा

प्यार किया तुम्हें
जैसे राहगीर करता है
रास्तों से प्यार और
भर लेता है झोलियों में सफर

प्यार किया तुम्हें
जैसे सूरज करता है
धरती से प्रेम
और शरद की दुपहरी
जगमगा उठती है

प्यार किया तुम्हें
जैसे पूस की ठिठुरती रात में
अलाव से करती हैं प्यार
ठिठुरती हथेलियाँ
समेटती हैं ज़िंदगी में भरोसे की ऊष्मा.

1 comment:

Onkar said...

बेहतरीन रचना