पार किया रास्ता
प्रार्थना की पंक्तियों के साथ
तुम आगे बढ़े
हम मिले गिरजे की उन सीढ़ियों पर
जहां न जाने कितने नाउम्मीद
लोगों के कदमों के निशान थे
कितनी उदासियों का ठौर था
कितने कनफेशन सर झुकाये बैठे थे
हमने एक दूसरे को थामने से पहले
उन तमाम नाउम्मीदियों को थामा
हमने एक दूसरे को चूमने से पहले
उन सीढ़ियों को चूमा
उतरते दिन की रोशनी
ने हम दोनों को ढँक लिया था।
हम दोनों सजदे में थे
हम दोनों प्यार में थे।

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