ऐसे पुरुषों से सवाल करना
लगभग गुनाह है
जो अपना प्रेम स्त्रियों पर उलीचने को
लगभग बेसब्र हुए जा रहे हैं
जो मजे से हँसकर कहते हैं
मेरे पास बहुत प्रेम है
और मैं सारे जमाने की औरतों में
बांटना चाहता हूँ
उनसे यह पूछना
कि इस सारे जमाने में
उनके घर की स्त्रियाँ भी शामिल हैं क्या
प्रेम के महीने का मज़ा किरकिरा कर देगा।
कोई लॉन्ग ड्राइव पर ले जाए
तो मुस्कुराकर चली जाइए
उनसे यह न पूछिये कि मुझसे पहले
जो लड़की कार की इस सीट पर बैठी थी
वो अब कैसी है, क्या तुम्हें मालूम है?
जब वो कहें कि 'तुम्हारी बहुत याद आती है'
तब उनसे यह पूछना अभद्रता होगी कि
यह मैसेज अभी-अभी तुमने कितनों को भेजा है
जब वो आपको प्रेम भरी निगाहों से देख रहे हों
आपकी हथेलियों को थामकर
दूर तक साथ चलने के वादे कर रहे हों
आप यह पूछने की गुस्ताखी कैसे करेंगी
कि जिसे जीवन भर साथ चलने के वादे के साथ
घर लाये हो, उसका क्या?
जब वो रिश्ते में ईमानदार होने की बात कहें
तो बस मुस्कुराइये यह सोचते हुए कि
उनका आपके साथ होना
उनकी बेईमानी का पहला सुबूत है
आखिर यह प्रेम का महीना है
प्रेम के महीने में सवाल नहीं पूछे जाते
प्रेम किया जाता है।
लेकिन, यह सबकुछ क्या सचमुच प्रेम है
हमेशा और प्रेम के इस महीने में भी
यह सवाल सिर्फ खुद से पूछना मेरी जान।

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