Wednesday, May 20, 2026

मैं मिलने जाऊँगी

 


पिछले बरस मेरे जन्मदिन पर चमोली में मित्र ने एक पौधा लगाया था। सुना है वह पौधा अब बड़ा हो गया है।
एक रोज मैं उस पौधे से मिलने जाऊँगी। उस शहर में एक नदी बहती है,जो मेरी सहेली है। मैं उस नदी से मिलने जाऊँगी। उस शहर के मौसम ने मेरे गाढ़े दुखों में गुलाबी फूल खिलाये थे, मैं उस मौसम से मिलने जाऊँगी।

जिस मित्र ने मेरे नाम के पौधे को न सिर्फ लगाया उसे साल भर सहेजा, बड़ा किया मैं उसे मित्र से मिलने जाऊँगी।

एक दिन मैं स्नेह से भरे हर व्यक्ति से मिलने जाऊँगी।

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