Thursday, December 31, 2015

हम तुझे बीतने नहीं देंगे...



कैलेण्डर के आखिरी पन्ने से गप्प लगाते लगाते कब नींद लगी पता ही  नहीं चला. ये लम्हों से गुफ्तगू के दौरान लम्हों का हमें जवाब का एक ढब है. 'नींद' हाँ ये सौगात मिली इस बरस. नींद को तरसी, बिन मौसम बरसी आँखों को नींद मिली। खुद पे फिर से ऐतबार करना सीखा, कुछ कमजोरियों को साधना सीखा, कुछ नयी कमजोरियों से दिल लगाना भी.

जिन नन्ही उँगलियों को थामकर अ ब स द लिखना सिखाया, जिसे साइकिल के आगे वाले डंडे पर बिठाकर इतराई फिरती है, जिसके होने ने जिंदगी को एक अलग ही एहसास दिया, उस नन्हे भाई को उसके ख़्वाबों  के साथ होते देखना का सुख मिला, उसके ख्वाबों से हमारा रिश्ता जुड़ा। परिवार शब्द में एक नयी धड़कन शामिल हुई, अपनी खिलखिलाहटों के साथ ऐ बीते हुए बरस तू, अब हम तुझे बीतने नहीं देंगे।

हथेलियों में अपनी बंद आँखों को खोलकर जिसने दो जहाँ खोल दिए थे अब उस बेटी का संसार खुलते देखती हूँ. बचपन और किशोरावस्था हाथ थामे चल रहे हैं. जिंदगी के संघर्ष भी संगीत से लगते हैं उसकी हथेलियां छूते हुए. जब मैं नींद में थी लाडो नानी से पूछकर बनाती है मेरे लिए हलवा, और ठीक बारह बजे हम एक दुसरे को मीठा खिलाते हैं. हमेशा माँ के बनाये मीठे से नए कैलेण्डर का पन्ना पलटती रही हूँ, इस बार बेटी के बनाये मीठे से. जिंदगी की इस मिठास के बाद भी कोई शिकायत करने से बड़ा गुनाह कोई नहीं।

6 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (02-01-2016) को "2016 की मेरी पहली चर्चा" (चर्चा अंक-2209) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
नववर्ष 2016 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

shashi purwar said...

आपको सपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

Kavita Rawat said...

बहुत सुन्दर...
आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

Onkar said...

सुन्दर पोस्ट

Tejkumar Suman said...

अति सुन्दर रचना। नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। सस्नेह

Asha Joglekar said...

नववर्ष का सुंदर संस्मरण। शुभ कामनाएँ।