Wednesday, February 22, 2012

कहने को तो बहुत रहा - विनोद कुमार शुक्ल


कहने को तो बहुत रहा
इतने दिनों
कि अभी तक

उसका कभी आना
याद नहीं
और उसका जाना
बार- बार याद आता है
कि अभी उसका जाना हुआ

उससे सब कहने को
कहने को तो कह दिया
जो उसके पीछे चला गया
पर उसे पुकारना रह गया

वह हमेशा
मेरे साथ
यहीं, दहलीज़ पर रह गया.

(शुक्रवार से साभार)

7 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

जाने वाले कुछ छोड़ जाते हैं यहाँ...

jyoti nishant said...

पर उसे पुकारना रह गया

वह हमेशा
मेरे साथ
यहीं, दहलीज़ पर रह गया.kitna saral lekin adbhut.

दीपिका रानी said...

खूबसूरत एहसास, शुक्रिया पढ़वाने का

सागर said...

हाथी आगे आगे चलता था, हाथी जितनी जगह पीछे पीछे छूटती जाती थी.

Dr.Nidhi Tandon said...

bahut sundar.....!!thanks for sharing.

dr.mahendrag said...

usne sab kahne ko kahne ko kah diya,jo uske peeche chala gaya
par use pukarna rah gaya

EK SUNDAR RACHNA

vidya said...

अदभुद एहसास....

सांझा करने के लिए शुक्रिया..