नानी कहती थीं कि बिटिया
कुछ बातों के बारे में लोग बात करेंगे नहीं कुछ बातों के बारे में बात कर नहीं पाएंगे
और जिन बातों के बारे में बात करेंगे
वो लगभग निरर्थक होंगी
जो बातें निरर्थक होंगी
वो सबसे ज्यादा सुनी जायेंगी।
सबसे पीड़ित व्यक्ति
अपनी पीड़ा की बात नहीं सुनेगा
उसके सामने दूसरे की पीड़ा को
मनोरंजन बनाकर परोस दिया जायेगा
वो अपनी भूखी अंतड़ियों को
बांधकर
हिंसा के दृश्यों में उगाये गए
आनंद के सागर में गोते लगाएगा।
वो यह नहीं समझ पाएगा कि वो जो दूसरा है
जिसकी पीड़ा में ढला मनोरंजन उसे
गुदगुदा रहा है
वो और कोई नहीं, वो खुद है
नानी कहती थीं कि
देखना, बाज़ार में सबसे ज्यादा दुख बिकेगा
लेकिन दुख टिकेगा नहीं
दुख की कमी सरकार पड़ने नहीं देगी
दुख को मनोरंजन में बदलने का काम
संसद तक जा पहुंचेगा।
देखना एक दिन मनुष्य की पीड़ा चुटकुला हो जाएगी
और चुटकुला सुनते हुए लोगों को देखना दुख होगा।
नानी कहती थीं...
