Sunday, September 27, 2015

क्या लौट आया है मोहब्बत का मौसम...



मैं कौन हूँ. मेरे चेहरे से जो नाम जुड़ा है वो किसका है. मेरे गले में पड़ी नाम की तख्ती पे क्या दर्ज है आखिर। इन उँगलियों की पोरों से किसका नाम लिखती रहती हूँ बेसाख्ता. ये किसके नाम की पुकार पे चौंक जाती हूँ. ये किसकी सांस है जिसे मैं सहती हूँ. ये रास्ते किसने बिछाये हैं जिन पर बेतहाशा भागते जाना, भागते जाना है. ये गुमसुम से पड़े ख्वाब किसके हैं. इन आँखों में छुपी बदलियाँ कहाँ से आयीं आखिर इनको कौन सी धरती चाहिए बरसने को. ये जो शोर का समंदर है, शब्दों का ढेर इसके पीछे छुपा मौन इस कदर जख्मी क्यों है आखिर। इतने लोगों के बीच तन्हाई क्यों है आखिर। तन्हाई के सीने में ये सिसकियों का सैलाब कहाँ से आया. कौन छोड़ गया होगा अपने क़दमों की चाप जिसपे उग आई हैं उदासी की सदाबहार बेल. मौसम सर्द हो चला है, आसमान थोड़ा और करीब आ गया है, चौदस का चाँद खिड़की से झांकते हुए क्यों अनमना सा दीखता है आज. अपने दुपट्टे में खुद को लपेटते किसको ढूंढ रही हूँ आकाश में.

क्या फिर से लौट आया है मोहब्बत का मौसम कि खुलने लगे हैं कुछ मीठे से दर्द भी. सवाल तन्हा हैं बहुत, 

4 comments:

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, महान समाज सुधारक राजा राम मोहन राय - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

yashoda agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 29 सितम्बर 2015को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (29-09-2015) को "डिजिटल इंडिया की दीवानगी मुबारक" (चर्चा अंक-2113) (चर्चा अंक-2109) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

shashi purwar said...

सुन्दर पोस्ट