Friday, January 27, 2017

जब नहीं आए थे तुम...


- अली सरदार जाफरी

जब नहीं आए थे तुम, तब भी तो तुम आए थे
आँख में नूर की और दिल में लहू की सूरत
याद की तरह धड़कते हुए दिल की सूरत

तुम नहीं आए अभी, फिर भी तो तुम आए हो
रात के सीने में महताब के खंज़र की तरह
सुब्‍हो के हाथ में ख़ुर्शीद के सागर की तरह

तुम नहीं आओगे जब, ​फिर भी तो तुम आओगे
ज़ुल्‍फ़ दर ज़ुल्‍फ़ ​बिखर जाएगा, ​फिर रात का रंग
शब–ए–तन्‍हाई में भी लुत्‍फ़–ए–मुलाक़ात का रंग

आओ आने की करें बात, कि तुम आए हो
अब तुम आए हो तो मैं कौन सी शै नज़र करूँ
के मेरे पास सिवा मेहर–ओ–वफ़ा कुछ भी नहीं

एक दिल एक तमन्ना के सिवा कुछ भी नहीं


5 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (29-01-2017) को "लोग लावारिस हो रहे हैं" (चर्चा अंक-2586) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar said...

बहुत सुन्दर

विरम सिंह said...

आपकी रचना बहुत सुन्दर है। हम चाहते हैं की आपकी इस पोस्ट को ओर भी लोग पढे । इसलिए आपकी पोस्ट को "पाँच लिंको का आनंद पर लिंक कर रहे है आप भी कल रविवार 29 जनवरी 2017 को ब्लाग पर जरूर पधारे ।

Digamber Naswa said...

लाजवाब नज़म ... मजा आ गया ...

Tejkumar Suman said...

बहुत ही सुुन्दर भाव।