Tuesday, November 22, 2016

आँखें हँस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली...



मीना कुमारी एक ऐसा नाम है जो सिर्फ गुज़र नहीं जाता, वो एहसास से चिपक जाता है. उनकी अदायगी, उनके अल्फाज़ और ज़िन्दगी से उनका रिश्ता...कॉलेज के ज़माने में ये नज़्म इस कदर मेरे पीछे पड़ी थी कि इसी में मुब्तिला रहने की बेताबी थी...जैसे कोई नशा हो...हल्का हल्का सा...रगों में घुलता हुआ...घूँट घूँट हलक से उतरता हुआ...दर्द का नशा...मीना आपा ने इस नशे को भरपूर जिया...ज़िन्दगी ने उनके साथ मुरव्वत की ही नहीं और एक रोज़ आज़िज़ आकर उन्होंने ज़िन्दगी से कहा, 'चल जा री जिन्दगी...'

हिंदी कविता ने एक बार मीना आपा का जादू फिर से जगा दिया है...बेहद खूबसूरत है ये अंदाज़ ए बयां...रश्मि अग्रवाल जी ने उन्हें याद करते हुए अपने भीतर ही मानो ज़ज्ब कर लिया हो...बाद मुद्दत फिर से मीना आपा हर वक़्त साथ रहने लगी हैं....दिन हैं कि अब भी टुकड़े टुकड़े ही बीत रहे हैं...शुक्रिया मनीष इस अमानत को इस तरह संजोने के लिए....

- मीना कुमारी 

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

जब चाहा दिल को समझें, हँसने की आवाज सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली

मातें कैसी घातें क्या, चलते रहना आठ पहर
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली

होंठों तक आते आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आँखों में, सादा सी जो बात मिली


3 comments:

kuldeep thakur said...

जय मां हाटेशवरी...
अनेक रचनाएं पढ़ी...
पर आप की रचना पसंद आयी...
हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
इस लिये आप की रचना...
दिनांक 24/11/2016 को
पांच लिंकों का आनंद
पर लिंक की गयी है...
इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24.11.2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2536 पर दिया जाएगा
धन्यवाद

Onkar said...

बहुत बढ़िया