Friday, December 25, 2015

कहानियों वाला आसमान



लड़की को कहानियां सुनना पसंद था, लड़के को कहानियां कहना। वो जब मिलते तो कहानियों का एक संसार खुलता। लड़के की किस्सागोई गज़ब थी, लड़की की कहानियों की प्यास अज़ब थी. लड़के की पोटली में किस्सों का खजाना था. प्यार की कहानियां, राजा रानी की कहानियां, तोता मैना की कहानियां, नदी, जंगल, पहाड़ की कहानियां, खेत खलिहान की कहानियां, परियों की कहानियां, टूटते तारे और अधूरी इच्छाओं की कहानियां।

लड़का कहानियां खुले आकाश के नीचे ही सुनाता था. उसकी एक शर्त थी कि कहानी सुनते वक़्त लड़की को सोना मना है. लड़की का कहानी में जागना ज़रूरी था, संसार में भले ही वो सोयी हो. इसके लिए लड़की को हुंकार भरनी होती थी. लड़की कभी ठंडी सड़कों पर गर्म सांसों की आंच सेंकते हुए कहानियां सुनती, कभी नदी के पानी में झिलमिलाते चाँद को देखते हुए, कभी घंटाघर की बंद हो चुकी सुइयों के ठीक नीचे बैठकर, कभी चाय की ठेली के पास चाय सुड़कते हुए कहानियां सुनती। वो लड़के को गौर से देखती, कहानियां सुनाते हुए वो किसी फ़क़ीर सा लगता था. लड़की को कहानी सुनना इबादत में होने सा लगता। लड़की गलती से भी हुंकार भरना नहीं भूलती थी.

एक रोज लड़का उसे बिना बताये दूर देश चला गया. लड़की को कहानियों की याद बेहद सताती। वो बिना कहानी के भी हुंकार भरने की आदी हो चुकी थी. वो लड़के की तलाश में भटकती फिरती। दिन महीने साल बीते, लड़की भटकती रही. कई कहानी सुनाने वाले आये. तरह-तरह की कहानियां निकालते झोली से, तरह तरह की किस्सागोई अपनाते लेकिन लड़की को लड़के की कहानियों का इंतज़ार था. अगर कभी एक टुकड़ा नींद उसे हासिल हो भी जाता तो वो सपने में भी हुंकार भरती।

उधर लड़का रास्ता भटक चुका था. किसी ने शायद उसके रास्तों को छुपा दिया था, या रास्तों की अदला-बदली कर दी थी. वो पांव उठाता लेकिन जाने कहाँ पहुँच जाता। लड़का कहानियां भूल गया था. सपनो के साथ साथ वो नींद से भी बिछड़ गया था, जागी आँखों से नींदों का इंतज़ार करता और बंद आँखों में सिसकता। अपनी पोटली टटोटलता वहां कहानियां बची ही नहीं थीं, कुछ टुकड़े बचे थे. उन टुकड़ों को जोड़ना फिजूल था. लड़का बस चलता जाता कि कभी तो सही राह तक पहुंचेगा ही.

लड़की अब खुद की कहानियां लिखने लगी. अब उसकी कहानियों में वो सब होता जो जिंदगी में नहीं होता था. उसके सारे ख्वाब कहानी होने लगे. आज़ाद होते ख्वाब कितने हसीन होते हैं. लड़की ख़्वाबों  की आंच और सुलगाती, जिंदगी बेरहमी की आंच और बढाती। लड़की ने दुनिया के तमाम बांस के जंगलों से कलम बनने का इसरार किया। नदी उसकी आँखों में थी बस रात से रोशनाई मांगी उसने और नदी में घोल दी. कहानियां रात के आसमान पे लिखी जाने लगीं। ये कहानियां ज़माने के पढ़ने के लिए नहीं उसके खुद के जीने के लिए थीं.

आसमान में अब तारे नहीं कहानियां बसने लगीं। एक रोज नींद खो चुका लड़का आसमान ताक रहा था. अचानक उसकी बहती आँखों में मुस्कान चमकने लगी. वो अपनी खोई हुई कहानियों को देख पा रहा था. पढ़ पा रहा था. उसे अरसे बाद अपने दिल की धड़कनों की आवाज़ सुनी। अरसे बाद उसकी चाय पीने की इच्छा हुई.

लड़की धरती के एक छोर पर कहानियां लिखती जा रही थी लड़का धरती के दूसरे छोर पर कहानियां पढ़ रहा था. लड़की भूखी प्यासी, जागी सोयी बस कहानिया लिखती, कि वो जानती थी कि उसने कहानी लिखनी बंद किया और उसकी नब्ज़ थमी. वो लिखती थी क्योंकि वो जीना चाहती थी. उधर लड़का कहानियों के आसमान को ओढ़ता, बिछाता। वो जानता था कि उसकी जिंदगी ऑक्सीज़न से नहीं आसमान पे लिखी जा रही कहानियों से चल रही है. लड़का कहानी पढ़ते हुए हुंकार भरता, लड़की कहानी लिखते हुए हुंकार भरती।

एक रोज लड़का कहानी पढ़ते पढ़ते चौंक के उठा और कहानी की परीजाद के महल  की तरफ जानेवाली सड़क पे चलने लगा. परीजाद को मारने के लिए राछस निकल चुका था. शहजादा परीजाद के महल से बहुत दूर था. उस रात बहुत बारिश हो रही थी. लड़का चलता रहा, चलता रहा... लड़की की आँख लग गयी कहानी लिखते-लिखते। शहज़ादे को जिस ख़ुफ़िया रस्ते से परीजाद के पास पहुंचकर उसे बचाना था वो शहज़ादे को बताने से पहले लड़की की आँख लग गयी. लड़का भागने लगा, उसे, सिर्फ उसे ही वो रास्ता पता था, उसे परीजाद तक पहुंचना था. वो ज़ोर ज़ोर से हुंकार ले रहा था कि धरती के किसी भी कोने में नींद में लुढक चुकी लड़की तक उसकी हुंकार पहुँच सके, वो जागे, कहानी लिखे, शहज़ादे को परीजाद तक राछस से पहले पहुंचाए। लेकिन लड़की को सदियों की जाग के बाद नींद आई थी. कलम उसके हाँथ में थी, आँखों की नदी में घुली रात की सियही उसके गालों पे सूख चुकी थी. लड़के के पांव भागते जा रहे थे कि अचानक उसे ठोकर लगी. वो उठा, भागा, चिल्लाया, लड़की को जगाने की कोशिश की लेकिन राछस परीजाद तक पहुँच चुका था.

परीजाद ने शहज़ादे को बहुत पुकारा, शहज़ादा परीजाद की मदद को बहुत तड़पा लेकिन वक़्त बेरहम था. लड़की नींद में हुंकार भर रही थी, लड़का बारिश को चीरता हुआ भाग रहा था,... राछस अट्हास कर रहा था.

कहानियां  उसी रोज़ भस्म हो गयीं सारी, आसमान खाली है कहानियों से. शहज़ादा रास्ता भटक चुका है,

शहज़ादे के इंतज़ार वाली घायल परीजाद राछस का मुह तोड़ने की तैयारी कर रही है.

लड़की कब्र में गहरी नींद सोयी है. लड़का उसकी नींद के सिरहाने बैठा है, वो कहानी सुनाता रहता है, कब्र से हुंकार उठती रहती है.


1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (27-12-2015) को "पल में तोला पल में माशा" (चर्चा अंक-2203) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'