Sunday, July 25, 2010

बातें जो जाननी जरूरी हैं...


कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ को रोकने के लिए जो कानून संसद के मानसून सत्र के लिए प्रस्तावित है उससे जुड़ी हुई जरूरी बातें-

1- अब तक सेक्सुअल हैरेसमेंट्स को जो मामले में शिकायत करने वाली महिलाओं की हिचक काफी आड़े आती थी. अगर वे शिकायत करती थीं तो उन्हें परेशान करने के दूसरे तरीके भी निकाले जाने लगे. मसलन उनका ट्रांसफर किया जाना, लंबी छुट्टी पर भेजा जाना या नौकरी से ही उन्हें निकाल दिया जाना. ये वो भय थे कि आमतौर पर महिलाएं अपने प्रति होने वाले हैरेसमेंट को या तो चुपचाप सहती रहती थीं या फिर जॉब से ही खुद को विड्रॉ कर लेती थीं.

प्रस्तावित कानून में इस बात का पूरा ख्याल रखा जायेगा कि शिकायत करने वाली महिला को ऑफिस में कोई दिक्कत न आये. जांच कमेटी महिला की पहचान को गुप्त रखेगी. उसकी और उसकी नौकरी की सुरक्षा का ख्याल रखेगी.

- यह कानून सरकारी, अद्र्धसरकारी, संगठित क्षेत्र, निजी तथा असंगठित क्षेत्रों पर एक समान रूप से लागू होगा.

- बिल में यह भी प्रस्ताव है कि अगर इंप्लॉयर कार्यस्थल में होने वाले यौन उत्पीडऩ पर कमेटी का गठन नहीं करता, जांच कमेटी की सिफारिशों पर अमल नहीं करता है, या झूठी शिकायत करने वाले दोषी पाए गए कर्मचारी और गवाह के खिलाफ एक्शन नहीं लेता है तो उस पर 50,000 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है.

- अगर यही गलती दूसरी बार संज्ञान में आती है तो जुर्माने की रकम तीन गुनी हो जायेगी. और उस कंपनी या ऑफिस को बंद भी किया जा सकता है. उसका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है.

- सरकारी तथा संगठित क्षेत्रों में यौन उत्पीडऩ रोकने के लिए कम से कम दो या अधिकतम 10 सदस्यों वाली आंतरिक शिकायत कमेटी का गठन अनिवार्य हो जायेगा.

- इस कमेटी की अध्यक्षता कोई महिला करेगी.

- असंगठित क्षेत्रों जैसे मजदूर या घरेलू नौकरानियों का यौन उत्पीडऩ रोकने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर की होगी. कलेक्टर को मामलों की जांच 90 दिनों में पूरी होनी जरूरी होगी.

- इस मामले के बारे में जानकारी सूचना के अधिकार के तहत भी नहीं ली जा सकेगी.


क्या है यौन उत्पीडऩ

- ऐसा कोई भी व्यवहार जो एक स्त्री को अवांछित हो और उसे शर्मिन्दा महसूस कराये.

- उससे सेक्सुअल डिमांड करना

- अश्लील टिप्पणी करना

-अश्लील फिल्में दिखाना या उन पर बात करना

- जानबूझकर उससे टकराना या उसके शरीर को छूने की कोशिश करना.

- अश्लील बातें करना

अश्लील एसएमएस करना

- काम में रोड़ा अटकाने की धमकी देना

- मौजूदा और भविष्य के जॉब उपलब्धियों को प्रभावित करने की धमकी देना

- अपने बिहेवियर से कार्यस्थल का माहौल असहज और दखलपूर्ण बनाना.

- अपने व्यवहार से कर्मचारी को बीमार व असुरक्षित बना देना.

- दुकान में उपभोक्ता से गलत व्यवहार करना

क्या हैं कार्यस्थल

- एनजीओ

- हॉस्पिटल्स

- कोचिंग

- कोरियर सेवा

- घरेलू नौकर

- दर्जी, ब्यूटी पार्लर

- स्कूल, कॉलेजेस

- रिसर्च इंस्टीट्यूट्स

- भवन या सड़क निर्माण

- बेकरी, हैंडलूम, कपड़ा प्रिंटिंग

- कृषि, ईंट भट्टा

- पंडा और टेंट कार्य

- शादियां, अचार, पापड़ बनाना, माचिस निर्माण

- मछली व्यवसाय

- डेयरी

- फ्लॉरीकल्चर, गार्डनिंग

- शहद एकत्रीकरण

- अगरबत्ती, बीड़ी, सिगार, मसाला और बिंदी निर्माण

- अखबार की बिक्री, पान की बिक्री

- सुनार की दुकान, हैंडीक्राफ्ट आइटम

- केबल टीवी नेटवर्क, वीडियो फोटोग्राफी

- बैण्ड कंपनी

- होटल उद्योग- रेस्त्रां, ढाबा, क्लब, कैटरिंग

(इस कानून के मिसयूज को रोकने के लिए अलग प्राविधान शामिल करने और अगर सेक्सुअल हैरेसमेंट किसी पुरुष के साथ होता है तो उसके लिए भी कुछ प्राविधान जोडऩे की बात भी उठायी जा रही है.)

5 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बात सिर्फ़ कानूनों से ही बनने वाली नहीं है. हज़ारों दूसरे कानून भी ऐसे ही रखे हैं हमारे यहां. सदियों की मानसिकता है यूं ही नहीं जाने वाली. अपने अधिकारों के लिए लड़ना भी होगा.

वन्दना said...

कल (26/7/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट देखियेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

नीरज तिवारी said...

बेहतरीन कोशिश।

Rangnath Singh said...

सभी को इस कानून का स्वागत करना चाहिए।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बढ़िया जानकारी