Sunday, January 3, 2010

प्रेम का मौसम

वेरा उन सपनों की कथा कहो (1996) से कविताओं का सफर शुरू करने वाले आलोक श्रीवास्तव के दो कविता संग्रह आने को हैं. पहला दिखना तुम सांझ तारे को और दूसरा दु:ख का देश और बुद्ध. इस बीच उनके दो कविता संग्रह और आये. जब भी वसंत के फूल खिलेंगे (2004) और यह धरती हमारा ही स्वप्न है (2006).वेरा की कविताओं ने एक पूरी पीढ़ी पर जादुई असर किया था. उन लोगों पर भी इन कविताओं का पूरा असर हुआ, जिन्हें कविताओं में खास रुचि नहीं थी. ये प्रेम में पगी हुई कविताएं थीं. प्रेम की परिभाषा का विस्तार देते हुए इन कविताओं में न मिलन की आस थी, न विछोह की पीड़ा या शिकायत, न मनुहार कोई. इनकी अलग दुनिया थी. जो प्रेम के साथ पूरा एक नया संसार रच रही थीं. इतिहास की यात्राएं करते हुए ये कविताएं भविष्य पर न$जर टिकाये थीं. ये प्रेम कविताएं समाज और मन दोनों पर बराबर पकड़ बनाये चलती हैं. यहां जो प्रेम के अर्थ खुले तो पूरा समाज भी खुला, वो कुहासे भी खुले, जिन्होंने मन के मासूम कोने को ढंाक रखा था. वेरा के बाद दिखना तुम सांझ तारे को पढऩा एक अलग ही अनुभव है. ये कविताएं नयी भूमि पर रची गयी महत्वपूर्ण कविताएं हैं. आलोक को बधाई देते हुए आइये पढ़ते हैं इसी संग्रह से दो कविताएं-

मैं नहीं कहता तुम्हें प्यार करताहूँ
मैं तो बस वह मौसम होना चाहता हूँ
तुम्हारे केशों को बिखरा दे तुम्हारे चेहरे पर
वह आवाजजो जंजीर बन जाए तुम्हारे पांवों में
और तुम एक दृश्य बन खड़ी रह जाओ
शाम का आसमान जिसे कौतुक से देखे
मैं तो वह रंग होना चाहता हूँ
जो तुम्हारी अंाख और पलक में
सपना बनकर घुलता जाए...
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तुम मुझे भूल भी जाओ
तो भी मैं सपना बन झांकूंगा
तुम्हारी आंख से
जहाँ भी तुम जाओगी
जो भी तुम करोगी
मई उसमें शामिल होऊंगादूर-दूर तक
मैं कहीं नहीं होऊंगा
पर तुम्हारी आंख
मुझे निहारेगीसूने किसी वन में
एकांत किसी राह पर
वीरान किसी मौसम में
तुम पत्तों में सुनोगी मेरी आवा$ज
हो सकता हैकिन्हीं पंखुरियों में
मुझे छुओ भी तुम
मैं तुम्हारा प्रेमी नहीं था
मैं तो बस एक मौसम था
तुम्हारी राह से गुजरा...

11 comments:

Udan Tashtari said...

सुन्दर रचनाएँ.

Udan Tashtari said...

आपका आभार पढ़वाने का.

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर रचनाएं है। धन्यवाद।

pragya pandey said...

बहुत सुंदर !

हिमांशु । Himanshu said...

आलोक जी की कविता-पुस्तक ’वेरा..’ ने सचमुच एक पीढ़ी की संवेदना को प्रभावित किया था-उसमें एक मैं हूँ । वेरा... को नेट पर कविता कोश में टाइप कर दिया है..बार-बार, बहुतों के पढ़े जाने के लिये !

आलोक जी की दोनों नई कविता पुस्तकों का स्वागत है ! आभार ।

पंकज said...

बहुत खूब. हर पोस्ट इतनी रोचक कि सोचता हूँ, पहिले क्यों न पूछा आपसे आपका पता.

Kishore Choudhary said...

कविताएं सुंदर है, कविता संग्रह का आवरण अधिक प्रभावित करता है ये कवि के भीतर के सौन्दर्य तत्व के प्रयासों को दिखाता है. आलोक जी को नए संग्रह की बधाइयां.

jyoti nishant said...

सही कहा वेरा उन ...ने मुझ जैसे कविता कि कम समझ रखनेवाले को भी बार बार पडने पर मजबूर किया .सुंदर आवरण और बेहद रोमांटिक काविताव केलीय धन्यवाद

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर रचनाएं है। धन्यवाद।

हृदय पुष्प said...

मनोहारी कवितायेँ यहाँ पढवाने के लिए आभार और धन्यवाद्.

संजय भास्कर said...

बहुत ही प्यारी रचना पढने को मिली.