Thursday, December 30, 2010

हम जीते जी मसरूफ़ रहे...

दाल धोकर कुकर में चढ़ा ही रही थी कि फोन की रिंगटोन बज उठी... फोन उठाया तो उधर से शहरयार जी की आवा$ज थी. तुम्हें कभी फुर्सत नहीं मिलेगी? आवाज में वही पुराना उलाहना और मेरी खुद से मुंह चुराती मेरी आवाज. दो मिनट का वक्त है तुम्हारे पास? उनकी आवाज से नाराजगी छलक रही थी. मैंने कुकर का ढक्कन लगाया, गैस धीमी की और फोन पर ध्यान लगाया. जी बताइये, मैं नज्म पढ़ रहा था फैज की. क्या तो कमाल का शायर था. तुमने पहले भी सुनी होगी लेकिन फिर से सुनो इसे- 

वो लोग बहुत ख़ुश$िकस्मत थे
जो इश्$क को काम समझते थे
या काम से आशि$की करते थे
हम जीते जी मसरूफ़ रहे
कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया.

काम इश्क़ के आड़े आता रहा
और इश्क़ से काम उलझता रहा
फिर आखिऱ तंग आकर हमने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया...

मैंने कहा, इसे सुना तो पहले भी कई बार था लेकिन आपकी आवाज और अंदाज में सुनना अच्छा लगा. वो बोले, मैं तो बहुत बुरा पढ़ता हूं. उतना ही बुरा जितना बुरा फैज पढ़ते थे. एक बार किसी ने फैज से कहा था कि काश आप जितना अच्छा लिखते हैं, उतना अच्छा पढ़ते भी. तो फैज ने जवाब दिया, सब काम हम ही करें क्या? अच्छा लिखें भी हम, अच्छा पढ़ें भी हम? सब लोग हंस दिये. मैं भी फैज का यही तर्क लोगों को देता हूं.

दो शायरों की स्मृतियां दो मिनट की छोटी सी कॉल में सिमट आई थीं. शहरयार की जानिब से फैज साहब की ये नज्म एक बार फिर सबके हवाले....

8 comments:

jyoti nishant said...

bahut umda maza aa gaya.faiz shaharyaar aur aapka andaj

नीरज गोस्वामी said...

फैज़ साहब की नज़्म में छुपा दर्द दिल को छू गया...आप खुशकिस्मत हैं जो आज देश के महान शायर की जबान से आपने एक दुसरे महान शायर की नज़्म सुनी...
फैज़ साहब की " लाजिम है के हम भी देखेंगे...हम देखेंगे..." नज़्म को जितनी बार इकबाल बनो की आवाज़ में सुना है रोंगटे खड़े हुए हैं...

नीरज

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

faiz saab kee ye nazm wakai bahut khubsurat hai ..aur mujhe bahut ajeez bhi..han lambe waqt baad yahaan fir se padh kar bahut achha laga..

प्रवीण पाण्डेय said...

काम से इश्क नहीं और इश्क में काम नहीं, क्या करें?

Asha said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति बधाई |
नव वर्ष शुभ और मंगलमय हो |
आशा

ललित शर्मा said...


फ़ैज साहब की सुंदर नज्म के लिए आभार
नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं

चुड़ैल से सामना-भुतहा रेस्ट हाउस और सन् 2010 की विदाई

ललित शर्मा said...


नूतन वर्ष 2011 की शुभकामनाएं

आपकी पोस्ट 1/1/11-1/11 की प्रथम वार्ता में शामिल है।

Dorothy said...

खूबसूरत प्रस्तुति. आभार.

अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.

आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.