Thursday, December 31, 2020
प्रस्तर मारीना- अनीता दुबे
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कुछ जीवनियों को पढ़कर लगता है कि जैसे हम भी वहीं खड़े थे और दृश्य घटित हो रहे थे ।कभी लगता है कि जीवन किसी महान व्यक्ति का उतना सरल कभी नहीं...
Thursday, December 24, 2020
अंतिमा- मध्य में होने का सुख
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ख़्वाब भरी आँखें अगर एकदम से खाली हो जायें और वो भी यूँ कि आँखों में बसने वाले ख़्वाब एक दिन कूद कर बाहर आ जाएँ और आसपास चहलकदमी करने लगें तो ...
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Sunday, December 20, 2020
धूप जो सहेली है
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और यह साल बीतने को आया आखिर. आखिरी से ठीक पहले वाले इतवार के पायदान पर खड़े होकर इस पूरे बरस को देख रही हूँ. आंदोलनों की आंच तब भी धधक रही ...
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Wednesday, December 9, 2020
जूही महारानी
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बित्ते भर की थीं जूही महारानी जब स्कूटर पर आगे चढ़कर घर आई थीं बरस भर पहले. फिर अरमानों की बेल सी चढ़ती गयीं...कूद फांद करते हुए आगे बढ़ने की ...
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Sunday, December 6, 2020
उपक्रम
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कोलाहल और शान्ति सब भीतर है हम रचते हैं उसे तलाशने का उपक्रम बाहर...
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