Thursday, March 27, 2025
जब उदास होती हूँ
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जब उदास होती हूँ किसी नदी का हाथ थाम लेती हूँ जब फफक कर रो पड़ने को होती हूँ किसी पेड़ को गले लगा लेती हूँ जब अन्याय की पराकाष्ठा होती है...
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Wednesday, March 26, 2025
मनोकामिनी सा मन
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बीतती नहीं वो रात जब आसमान झील में औंधा पड़ा था और जुगनू हमारे साथ झील में पड़े सितारों से बतिया रहे थे हवाओं में एक खुनक थी और तुमने मेर...
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Monday, March 24, 2025
जिद्दी हवाओं के गीत
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झील में डुबकी लगाकर आई हवाओं में कोई बेफिक्री तारी थी देर रात की जाग हवाओं की आँखों की चमक थी उन्हें न सूरज से निस्बत न पहाड़ से, न जंगल...
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Sunday, March 23, 2025
पंछी घर देर ले लौटे थे उस रोज...
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दुनियादारी और जिम्मेदारियों के बोझ से बस झुकने को थे कांधे कि तुम्हारे स्पर्श के फाहे राहत बन उतर आए थे उन पर आँखों के नीचे सदियों के रत...
Saturday, March 22, 2025
हम मिलेंगे
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हम मिलेंगे जब सूरज डूबा नहीं होगा और साँझ नदी में झिलमिलाते दिन की परछाईं एकटक देख रही होगी हम मिलेंगे जब नफ़रतें अपना सामान समेटकर जा...
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