Monday, August 25, 2025
संवेदनात्मक दृष्टि का परिचायक है उपन्यास 'कबिरा सोई पीर है'
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- ममता सिंह इस किताब को पढ़ते हुए कई पन्नों पर दृष्टि रुक गई,उन्हें दुबारा,तिबारा पढ़ा..गले में जैसे कुछ अटक सा गया..क्या था वह? वह थी समा...
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Sunday, August 10, 2025
पाठकों को बांधता है 'कबिरा सोई पीर है'
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- केवल तिवारी जीवन रूपी रंगमंच में न जाने कितने किरदारों का हमें सामना करना पड़ता है। हम खुद भी तो अनेक तरह का नाटक करते हैं। लेकिन जब अच्छ...
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Friday, August 1, 2025
टूटन
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टूटी हुई नींद चिड़िया का टूटा पंख है जिसके किनारे टूटन के दुःख से सने हैं. - प्रतिभा कटियार
कोई ताज़ा हवा चली है अभी ...
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हँसती खिलखिलाती, इठलाती, शरारतें करती लड़की उस रोज गुमसुम हो गई जब वो सांझ के काँधे से लगकर झील में बस उतरने जा रहे सूरज को ताक रही थी और साँ...
Saturday, July 26, 2025
एक कोना धूप एक बूंद बारिश- पूरन जोशी
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कविता पढ़ते हुए लोग मुझे बेहद पसंद हैं। कविताओं के बारे में ऐसा है कि उन्हें पढ़ने के बाद एक लंबी चुप्पी में उतरा जा सकता है। कविताओं के बारे ...
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