Tuesday, June 11, 2019
जब भी तू आये जगाता हुआ जादू आये...
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चाँद एकदम ठीक से सज गया है खिड़की में. न कम न ज्यादा, न रत्ती भर दाएं, न रत्ती भर बाएं खिड़की के ठीक सामने। सामने वाले पेड़ के कोने से झांकत...
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Thursday, May 16, 2019
मेरा कोना भीग रहा है
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जैसे किसी सपने में आँख खुली हो. जैसे मौन में कोई बात चली हो. खामोश बात धीमे धीमे सुबह की ओसभरी घास पर चलते हुए. मैं इस मौन को सुन रही हू...
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Wednesday, May 1, 2019
घर
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रंग भरे जा रहे हैं दीवारों पर. दीवारें जिन पर मेरा नाम लिखा है शायद. कागज के एक पुर्जे पर लिखा मेरा नाम जिस पर लगी तमाम सरकारी मुहरें. ज...
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Tuesday, April 30, 2019
म्यूजिक टीचर के असर में रहना
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जैसे बुरे दिनों के लिए अम्मा छुपा के रखती थीं रसोई के डिब्बों में कुछ रूपये, जैसे बाबा बचा के रखते थे भीतर वाले खलीते (जेब) में गाढे वक़्...
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Monday, April 22, 2019
'ये कविताओं के पंख फ़ैलाने के दिन हैं '
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'क' से कविता यह नाम नया है लेकिन इस भावना वाला काम तो मैं तकरीबन 60-65 सालों से कर रहा हूँ कि दूसरों की कविताओं को सुनाना. वहां...
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