प्रतिभा की दुनिया ...
Sunday, January 13, 2013

मैंने...तेरे लिए रस्ता बिछाया है...

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वो चाय की प्याली के साथ धूप का एक टुकड़ा भी रख गई थी सिरहाने. उसके होठों पर कोई गीत रखा था, जिसे उसने मेरे करीब आते हुए छुपा लिया था फि...
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Saturday, January 12, 2013

याद कैलेण्डर

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जनवरी- सर्दियों के लिहाफ से चुपके निकलता है सूरज कुछ चहलकदमी करके, वापस लौट जाता है यादों को लौटने का हुनर क्यों नहीं आता... फरवर...
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Friday, December 14, 2012

बेसलीका ही रहे तुम

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तुम्हें जल्दी थी जाने की हमेशा की तरह वैसी ही जैसे आने के वक्त थी बिना कोई दस्तक दिए किसी की इजाजत का इंतजार किये बस मुंह उठाये च...
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Tuesday, December 11, 2012

जीवन यात्रा को विराम कब मिलेगा?

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10 नवंबर- पूरा दिन जैसे सर्रर्रर्र से बीत गया हो. पूरे हफ्ते की मेहनत का रंग आज दिखा. एक सेमिनार होना था जो खूब अच्छा हो गया. कैम्पस में ...
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Monday, December 10, 2012

डल झील- जैसे महबूब को जी भर के देखना

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9 नवंबर सूरज की हथेली पर मानो किसी ने बर्फ का ढेला रख दिया हो. ठंडी सी गर्माहट थी उसके आने में. हमारे यहां आने के मकसद को बस अंतिम अंजाम...
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Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
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