Wednesday, May 21, 2014
देखना खुद को इस तरह...
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देखना खुद को इस तरह जिस तरह देखता है कोई खिड़की से झांकती हुई सड़क को सड़क पे दौड़ती हुई गाड़ियों को पड़ोसी के बगीचे में खिलते फूल ...
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Sunday, May 18, 2014
देश और समाज के खिलाफ प्रेम
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उफ्फ्फ्फ़ ये झरझर झरती बेसबब मुस्कुराहटें जब देखो खिलखिल खिलखिल न इन्हें चिलचिलाती धूप की फिकर न किसी तूफान का डर न रात का पता न दिन क...
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Wednesday, May 14, 2014
तुम भी बस.…
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गुलमोहर- सुनो…कविता सुनोगे? अमलताश- रहने दो, बस तुम साथ रहो कुछ देर..... गुलमोहर- (शरमाते हुए) तुम भी बस.… ----------------------...
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Wednesday, May 7, 2014
लौटना, दरअसल सिर्फ उसका प्रेम था.....
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उसे जाने दिया क्योंकि यकीन था कि वो जायेगा नहीं या यूँ कहें कि जा पायेगा ही नहीं इस जाने देने में अहंकार था जिसे प्रेम का नाम दिया ...
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Tuesday, April 15, 2014
इन सपनों को कौन गाएगा...अजेय
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बाद मुद्दत कुछ पन्नों को पलटते हुए नदी की कल-कल की आवाज सुनाई दी...। बाद मुद्दत 'गांव' सिर्फ शब्द की तरह नहीं गुजरा आंखों के साम...
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