प्रतिभा की दुनिया ...
Monday, November 14, 2011

तुमने उसे कहीं देखा है क्या...

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वो रात का मुसाफिर था. उसके कंधे पर एक पोटली रहती थी. जो खासी भारी सी मालूम पड़ती थी. उस पोटली के बोझ से मुसाफिर अक्सर झुककर चलता था....
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Friday, November 11, 2011

छूटना...

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यात्राओं  में सबसे सुन्दर क्या लगता है? ये मैंने अपने आपसे पूछा. एक चुप्पी जो मेरे ही भीतर थी, उसने भीतर ही भीतर चहलकदमी शुरू कर दी. जवा...
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Tuesday, November 8, 2011

पंद्रह साल का समय कितनी कम जगह घेरता है

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1832 में एक पोलिश कुलीन महिला बाल्‍ज़ाक का उपन्‍यास 'द मैजिक स्किन' पढ़ती है. अपने प्रिय लेखक द्वारा महिला चरित्र का इतना नकारात्‍म...
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Sunday, November 6, 2011

जीने का सलीका है प्रतिरोध

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संकल्प के साथी भोजपुरी गीतों की खुशबू के साथ  किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार...नरेश सक्सेना  अनुपमा श्रीनिवासन   उमा चक्र...
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Monday, October 31, 2011

इंतजार...

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नर्म मखमली घास पर नंगे पांव धीरे-धीरे चलते हुए उन्हें घंटों बीत चुके थे. उनमें कोई संवाद नहीं हो रहा था. न बोला, न अबोला. वे अपने-अपने ...
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Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
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