Friday, September 30, 2011
हथेली पर उगती खुशबू
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मैं शायद गहरी नींद में थी. बहुत गहरी नींद. तभी अचानक हथेली पर कुछ रेंगता हुआ सा महसूस हुआ. हथेली को बंद करना चाहा लेकिन नहीं कर पाई. उंगलि...
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Tuesday, September 27, 2011
कभी यूँ भी तो हो...
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कभी यूँ भी तो हो दरिया का साहिल हो पूरे चाँद की रात हो और तुम आओ... परियों की महफ़िल हो कोई तुम्हारी बात हो और तुम आओ.. ये नर्म मुला...
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Thursday, September 22, 2011
आकाश में बोए हीरे मोती
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तुमने वर्षांत पर मुझे एक बाली दी धान की क्वांर में उजाली दी कांस की कातिक में झउया भर फूल हरसिंगार के अगहन में बंसी दी बांस की माघ...
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Sunday, September 18, 2011
तेरे अलावा याद हमें सब आते हैं -शहरयार
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वो अक्सर हमसे नाराज रहते हैं. वो हर ख़ुशी में हमें शामिल करते हैं, गम में क्यों नहीं करते. क्यों नहीं छूने देते अपनी तन्हाई. शायर शहरयार को...
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Saturday, September 17, 2011
बुलबुल को बागबां से न सैय्याद से गिला
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पहाड़ों से टकराकर कुछ आवाजें इतनी खूबसूरत हो उठी थीं कि मानो धरती ने अपने पैरो में कोई पायल बाँध ली हो. यूँ दूरियां सिर्फ दिलों की ही होती...
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