प्रतिभा की दुनिया ...
Friday, May 29, 2009

उन बूढ़े पहाड़ों पर

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धरती खामोश। आसमान भी चुप. कहीं कोई आवाज नहीं. न हवाओं की ज़ुम्बिश, न परिंदों की सरगोशी ही. वादियां एकदम वीरान. जैसे सदियों से रखा हो मौन. प...
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Thursday, May 28, 2009

कबीर के करीब- ३

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कबीर गर्व न कीजिए ऊंचा देख आवास काल परौ भुंई लेटना ऊपर जमसी घास। ज्यों नैनों में पुतली त्यों मालिक घट माहिं मूरख लोग न जानहिं बाहिर ढू...
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Sunday, May 24, 2009

kabeer ke kareeb- 2

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जैसे तिल में तेल है ज्यों चकमक में आग तेरा सांई तुझ में है तू जाग सके तो जाग. माया मरी न मन मरा मर -मर गए शरीर आशा तृष्णा न मरी कह गए द...
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Saturday, May 23, 2009

कबीर के करीब

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कबीर उनमें से हैं जिन्हें पढऩा हमेशा सुकून देता है। बेहद सामयिक, सुलझा, सरल काव्य. कबीर के करीब जाने पर ज्ञान और सुकून की गंगा बहती नज़र आत...
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Friday, May 22, 2009

ख्वाब टूटे न कोई

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देखो, आहिस्ता चलो और भी आहिस्ता जरा देखना, सोच समझकर जरा पांव रखना जोर से बज न उठे पैरों की आवाज कहीं कांच के ख्वाब हैं बिखरे हुए तनहाई म...
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Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
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