Wednesday, March 6, 2024
उम्मीद
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एक रोज जरा सी लापरवाही से उम्मीद के जो बीज हथेलियों से छिटक कर बिखर गए थे सोचा न था कि वो इस कदर उग आएंगे और ठीक उस वक़्त थामेंगे हाथ जब मन ...
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Friday, March 1, 2024
अपनेपन की रोशनी
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सांत्वना और सहानुभूति के शब्दों की हथेलियाँ खाली ही मिलीं हमेशा की तरह उनके चेहरे पर अपनेपन का आवरण था उनके दुख जताते शब्दों में छुपा था एक ...
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Wednesday, February 7, 2024
साथ ही साहस है
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क्या मैं रोना चाहती हूँ? क्या मैं उदास हूँ? क्या मैं दुखी हूँ? क्या मुझे सांत्वना की दरकार है? इन सवालों से घिरी ही थी कि कुछ नए सवाल उग आए ...
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Monday, January 8, 2024
आने से ज्यादा जरूरी है आने की इच्छा
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ओ जानाँ, तुम्हारा आकर जाना मुझे प्रिय है कि छूट जाती है एक ख़ुशबू तुम्हारे पीछे जो डोलती-फिरती है मरे दायें बायें तुम्हारे जाने के बाद, ...
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Sunday, December 31, 2023
जग दर्शन का मेला
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इस बरस की अंतिम सुबह चाय के साथ पहली लाइन पढ़ी, 'जब चाँद को पहली बार देखा तो लगा यही है वह, जिससे अपने मन की बात कह सकती हूँ।' एक सलो...
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