प्रतिभा की दुनिया ...
Monday, January 30, 2023

प्रेम- दो कवितायें

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वादियाँ दूधिया कोहरे से ढंकी थीं  और सूरज नन्ही बदलियों में छुपकर  लुका छिपी का खेल खेल रहा था  बसंत हथेलियों पर    सपनों की कोंपलों खिलने क...
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Thursday, January 26, 2023

जब बसंत आता है...

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जब बसन्त आता है तब बसन्त कहाँ आता है वो तो आता है तब जब आती है मिलने की आस जब खिलते हैं मन के पलाश जब भरोसे पर बढ़ता है तनिक और भरोसा जब टूटन...
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Sunday, January 22, 2023

तितली-मानव कौल

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हम अमरकंटक गए थे तितलियाँ देखने लेकिन वो मुझे मिली घर में ही. जब लौटकर आई तो देखा ड्राइंगरूम में लगे पाम के पेड़ में तितली ने जन्म लिया है. उ...
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Monday, January 16, 2023

जीने की तलब

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हथेलियाँ फैलाई थीं तो आसमान का एक टुकड़ा उतर आया था हथेलियों पर. धूप और बारिश ने मिलकर आसमान के उस सुनहरे टुकड़े को और भी निखार दिया था. लड़की...
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Monday, January 2, 2023

नया बरस नया संग्रह

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मेरे लिए अपनी कविताओं के बारे में बात करना सबसे मुश्किल होता है जबकि अपनी पसंद की, प्रिय कवियों की कविताओं के बारे में घंटों बात कर सकती हूँ...
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Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
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