Tuesday, February 27, 2018
फेनिल लहरों का दुलार...
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छोड़ जाऊंगी तुम्हारे लिए बसंत का सारा उजास रक्तिम आभा उगते सूर्य की छोड़ जाउंगी फसलों से भरे खेत वक़्त पे आने वाला मानसून बर्फ से ढंक...
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Wednesday, February 21, 2018
वो दिन मुझसे खेल रहा है...
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सीढियां उतरती हूँ तो जी चाहता है सीढियां ख़त्म ही न हों कभी. रास्तों पर निकलती हूँ तो चलती ही जाती हूँ लगातार, बिना थके, बिना रुके. खूब बा...
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Monday, February 19, 2018
उनका सम्मान उनका हक है
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एक मेज बड़ी सी. उस मेज के उस पार जमीन पर दरी बिछाकर बैठे बच्चे. उनकी आँखों में ‘कुछ मिलेगा’ की उम्मीद. मेज के इस पार कुछ गर्वीले लोग. म...
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Tuesday, January 30, 2018
पुकार लेना बारिश
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कई बार चाहा अपना नाम बदल लूं, नदी रख लूं अपना नाम. कभी जी करता कोई बारिश कहकर पुकारे तो एक बार. बहुत दिल चाहता कोई गुलमोहर कहता कभी. कभी...
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Sunday, January 21, 2018
मुन्नार की पुकार और जीने की तलब
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जीवन से जैसे-जैसे नमी की कमी होती जाती है सपने में नदियों, झरनों, समन्दर, बारिश की आवाजाही बढ़ जाती है. पिछ्ला पूरा बरस सपने में बारिशों...
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