Monday, February 27, 2017
पलाश से भरी धरती भी उदास हो सकती है
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पलाश से भरी धरती भी उदास हो सकती है तारों भरा आसमान भी हो सकता है गुमसुम मुस्कुराहटों के मौसम के संग भी आ सकती हैं निराश बारिशें तमा...
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Tuesday, February 21, 2017
भटकने का सुख मामूली नहीं होता...
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कभी तो लगता है बरसों से कोई लम्हा नहीं मिला और कभी यूँ भी होता है कि एक लम्हे में हज़ार लम्हे उग आते हैं. कभी तो लगता है एक मोड़ पर ही ...
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Friday, February 10, 2017
कि तुम मेरी कोई नहीं...
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जब मैं तुम्हें पुकारना चाहता हूँ मैं उठकर पानी पीता हूँ खिड़की से दिखने वाली सड़क को देर तक देखता रहता हूँ सड़क, यूँ लगातार घूरे जाने ...
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Thursday, February 9, 2017
निदा फ़ाज़ली: एक टुकड़ा याद
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कोई खिड़की से झांककर कहता है, 'गाड़ी आराम से चलाना, आहिस्ता.’ मैं मुस्कुराकर देखती हूँ. वो निदा फ़ाज़ली से आखिरी मुलाकात का आखिरी लम्हा थ...
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Monday, February 6, 2017
मैं तुम से प्यार करता हूँ...
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- नाज़िम हिकमत घुटनों के बल बैठा मैं निहार रहा हूँ धरती, घास, कीट-पतंग, नीले फूलों से लदी छोटी टहनियाँ. तुम बसन्त की धरती हो, ...
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