प्रतिभा की दुनिया ...
Wednesday, July 24, 2013

नींद में इन दिनों ख्वाब नहीं आते...

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ख्वाब आजकल आते नहीं आँखों में कि नींद बहुत आती है कोई ख्वाब दरवाजे से सर टिकाकर बैठा है,  एकदम सटकर बीती रात के ख्वाब से कोई ख...
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Tuesday, July 23, 2013

हौले से रखना कदम ओ सावन...

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पूरनमाशी के रोज आषाढ़ ने सावन से कुछ शर्त लगा ली. आषाढ़ की बारिश का गुरूर ही कुछ और होता है और कैलेण्डर तो बस याद के पन्ने पलटता है. म...
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Tuesday, June 18, 2013

वो लोगों से दुःख मांगता था...

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वो कोई दरवेश था शायद. उसके कंधे पर कोई पोटली नहीं थी. लेकिन कुछ था तो पोटलीनुमा. अदश्य. वो कहता था कि उसके पास दुनिया के हर सवाल का जवाब...
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Wednesday, June 5, 2013

मायूस तो हूं वायदे से तेरे

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मायूस तो हूं वायदे से तेरे कुछ आस नहीं कुछ आस भी है, मैं अपने ख्यालों के सदके तू पास नहीं और पास भी है. दिल ने तो खुशी माँगी थी मगर, ...
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Friday, May 31, 2013

रात गुलज़ार के संग काट आयी, बाबुषा

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कुछ लोग बड़े सलीके से जिन्दगी की नब्ज को थामते हैं। सहेजते हैं घर के कोने, तरतीब से सजाते हैं ख्वाब पलकों पर. सब कितना दुरुस्त होता है...
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Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
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