Sunday, May 29, 2011
मान ली हार, ओ मेरी जान मरीना!
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जब भी मुश्किलें रास्ता रोकती हैं, न जाने कहाँ से एक आवाज का हाथ अपने शानों पे महसूस होता है. वो आवाज कहती है कि 'दुःख को दुःख कहने से ...
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Thursday, May 26, 2011
आती हुई लहरें और आती हुई लड़की..
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समंदर के किनारे उस रोज उदास हो जाते, जब लड़की के घुंघरुओं की आवाज किनारों से उठते हुए लहरों में घुलती नहीं थी. लड़की रोज समंदर के ...
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Tuesday, May 24, 2011
I love this IDIOT...
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- निधि सक्सेना सर्दी लग रही है...बहुत, मैंने सोचा भी नहीं था कि अपने देश में इतनी सर्दी होगी। आदत नहीं रह गई है ना! दोस्तोव्यस्की की बौड़म ...
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Monday, May 23, 2011
कोई कला समाज नहीं बदलती-मानव कौल
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मानव कौल युवा नाटककार, कवि, कहानीकार और अब फिल्मकार भी हैं. उनकी प्रयोगधर्मिता उनकी पहचान है. नाटक शक्कर के पांच दाने, पार्क, मम्ताज भाई न...
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Saturday, May 21, 2011
चलो कि अब हम गुनहगार ही सही...
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सियासत के मायने हम क्या जानें हम तो बस गेहूं की बालियों के पकने की खुशबू को ही जानते हैं दुनिया की सबसे प्यारी खुशबू के रूप मे...
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