प्रतिभा की दुनिया ...
Thursday, April 30, 2009

हँसता हुआ आंसू

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हंसता हुआ एक खूबसूरत आंसू कब से  संभालकर रखा था एक आंसू. वो आखिरी आंसू था. कितनी ही बदलियां आंखों से होकर बरसती रहीं बरसों. लेकिन ये एक ...
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Tuesday, April 28, 2009

सारे सुखन तुम्हारे

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लो फूल सारे तुम रख लो अब से। मुझे नहीं चाहिए। कांटे ठीक हैं मेरे लिए। कांटों के मुरझाने का कोई खतरा नहीं होता. न ही इनकी परवरिश करनी पड़त...
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Sunday, April 26, 2009

कविता ही बचायेगी

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धीरे-धीरे खत्म हो रहा sab कुछ, जीवन में घुलने लगा है मीठा जहर प्रेम ने कर लिया है किनारा। कलाएं औंधे मुंह पड़ी हैं, व्यावसायिकता सि...
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Saturday, April 25, 2009

उफ़ ये भीगा हुआ अखबार !

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कल लखनऊ के सारे अखबार खून से रंगे होंगे। लॉमार्टीनियर स्कूल के बच्चों की वैन सुबह-सुबह रोडवेज की बस से टकरा गई और पूरी सुबह में, शहर में दर...
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Friday, April 24, 2009

प्रेम तो नसीब है!

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कितने असहाय, कितने कमजोर, कितने निरीह हो गये दुनिया के सारे शब्द, जब दिल के भावों को जस का तस पहुंचने की बारी आयी. दुनिया का हर शब्दकोश निरर...
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Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
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