Saturday, February 28, 2026

हम दोनों प्यार में थे




अज़ान की आवाज़ के साथ मैंने 
पार किया रास्ता 
प्रार्थना की पंक्तियों के साथ 
तुम आगे बढ़े 

हम मिले गिरजे की उन सीढ़ियों पर 
जहां न जाने कितने नाउम्मीद
लोगों के कदमों के निशान थे 
कितनी उदासियों का ठौर था 
कितने कनफेशन सर झुकाये बैठे थे 

हमने एक दूसरे को थामने से पहले 
उन तमाम नाउम्मीदियों को थामा 
हमने एक दूसरे को चूमने से पहले 
उन सीढ़ियों को चूमा 

उतरते दिन की रोशनी 
ने हम दोनों को ढँक लिया था। 

हम दोनों सजदे में थे 
हम दोनों प्यार में थे।  


3 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 1 मार्च 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  2. सुंदर , प्यारी सी अभिव्यक्ति।।।।

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  3. तुम्हारी यह कविता पढ़कर मेरे मन में एक गहरी शांति उतर आई। तुमने अज़ान, प्रार्थना और गिरजे की सीढ़ियों को जिस तरह एक साथ जोड़ा, वह मुझे बहुत खूबसूरत लगा। मैं तुम्हारे शब्दों में प्यार से पहले इंसानियत को थामने की ताकत साफ महसूस करता हूँ।

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