Wednesday, March 27, 2019

अभिनय


अपनी उन्मुक्त हंसी
दौड़ते भागते क़दमों की रफ़्तार
पार्टियों में लचकती कमर
और शोख अदाओं में

त्योहारों में मन जतन से शामिल होने
पकवानों को कभी खाते, कभी बनाने
दोस्तों के संग धौल-धप्पा करने
बेवजह की बातों में रूठ जाने
और फिर खुद ही मान जाने में

छुट्टे पैसे के लिए सब्जी वाले से झिक-झिक करने
और सिनेमा देखते वक़्त चुपके से रो लेने
कॉफ़ी की खुशबू में डूबने
और उतरते सूरज के संग मुस्कुराने में

सहकर्मियों संग करते हुए मजाक
या चुहलबाजियों में
वो आसानी से छुपा लेती हैंअपनी उदासियां

अभिनय कला में प्रवीण बनाता है जीवन स्त्रियों को. .

#worldtheatreday

8 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 28.3.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3288 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. सुन्दर। उदासियाँ झाँकती भी हैं।

    ReplyDelete
  3. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन अब अंतरिक्ष तक सर्जिकल स्ट्राइक करने में सक्षम... ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

    ReplyDelete
  4. सहकर्मियों संग करते हुए मजाक
    या चुहलबाजियों में
    वो आसानी से छुपा लेती हैंअपनी उदासियां
    अभिनय कला में प्रवीण बनाता है जीवन स्त्रियों को. .
    बहुत ही सुन्दर. ...लाजवाब...
    वाह!!!

    ReplyDelete
  5. सचमुच, जीवन में मिलने वाले कड़वे मीठे अनुभव अभिनय कला में प्रवीण बना देते हैं हमें।

    ReplyDelete
  6. वो आसानी से छुपा लेती हैंअपनी उदासियां

    अभिनय कला में प्रवीण बनाता है जीवन स्त्रियों को
    ...जीवन के हर पल में जीवन ढूंढ ही लेती हैं स्त्रियाँ...बहुत सटीक और सारगर्भित अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  7. वो आसानी से छुपा लेती हैंअपनी उदासियां

    अभिनय कला में प्रवीण बनाता है जीवन स्त्रियों को.
    बहुत सुन्दर...
    वाह!!!

    ReplyDelete
  8. बहुत ही सुन्दर. ...लाजवाब...

    ReplyDelete