प्रतिभा की दुनिया ...
Sunday, July 31, 2022

अच्छा लगने का स्वाद

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तुम्हारा पास होना  जैसे धरती पर छनक उठना  ख्वाहिशों की पाजेब  रुनझुन रुनझुन रुनझुन रुनझुन   जिसकी धुन में गुम हों  हम तुम तुम हम  जैसे खिलना...
Wednesday, July 27, 2022

होंठों से ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं चुम्बन...

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किसी कवि को पढ़ना उसे पढ़ते हुए देखने जैसा होना चाहिए. गौरव गुप्ता ख़ामोशी से एक स्पेस बना रहे हैं. उनकी पोस्ट, कवितायें पढ़ती रहती हूँ. उनमें ...
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Sunday, July 24, 2022

और हम भटक चुके थे

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जीवन में जितना उजला मिला वो हरे के पास मिला. कच्ची सी नींद में थी कि कोई सिरहाने एक उजली सी सुबह रख गया. हरे रंग में जगमगाती उजली सी सुबह. ...
Friday, July 22, 2022

भाषा से बाहर

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जब मैं लिखना चाहती हूँ सदियों से गले के भीतर अटकी हुई सिसकी के बारे में लाख खंगालने के बावजूद भाषा के पास नहीं मिलता कोई शब्द, जब मैं लिखना ...
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Thursday, July 14, 2022

पढ़ना यानी मिलना अपनी रूह से...

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आज की सुबह बारिश नहीं है. हरारत भी नहीं है. अजब सी उदास सी शांति है. किसी भी कहानी का आरम्भ और अंत मुझे मुश्किल लगता है. जैसे एक ठीक सुर से ...
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Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
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