प्रतिभा की दुनिया ...
Tuesday, January 30, 2018

पुकार लेना बारिश

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कई बार चाहा अपना नाम बदल लूं, नदी रख लूं अपना नाम. कभी जी करता कोई बारिश कहकर पुकारे तो एक बार. बहुत दिल चाहता कोई गुलमोहर कहता कभी. कभी...
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Sunday, January 21, 2018

मुन्नार की पुकार और जीने की तलब

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जीवन से जैसे-जैसे नमी की कमी होती जाती है सपने में नदियों, झरनों, समन्दर, बारिश की आवाजाही बढ़ जाती है. पिछ्ला पूरा बरस सपने में बारिशों...
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Saturday, January 20, 2018

पहाड़ तू तो मेरा दगढ़िया ठैरा

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- चन्द्रकला भंडारी हाँला पहाड़,तू कैसे सोच सकता है कि तेरी याद नहीं आती. तूने ही तो दी थी मुझे कठोर जीवन की आपाधापियों के लाधने की शिक्षा...
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Tuesday, January 16, 2018

प्यार राजकुमार!

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आज जो लिखने जो रही हूँ वो शायद कभी लिखा नहीं. सोचा भी नहीं. कुछ शरारती सा हो रहा है मन कि बड़े दिन बाद किसी पर दिल आया है. फ़िदा फ़िदा सा फ...
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Sunday, January 14, 2018

इच्छा और साम्थर्य की डोर पर लहराती पतंगे

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नीले आसमान पर उड़ती फिरती हैं रंग-बिरंगी पतंगे कि मन बावरा हुआ जाता है, मन पतंग हुआ जाता है। आसमान छूने को बेकल पतंग। नील गगन में सजी-धज...
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Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
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