Tuesday, December 29, 2015
विस्मित माँ की डायरी
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जिन्दगी की हर हरारत पे एक ही मरहम है, हमारे बच्चे। हर दिन हमें चौंकाते हैं. हम दोनों माँ बेटी दिन भर बच्चों की तरह झगड़ते हैं, रूठते ...
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Monday, December 28, 2015
चीज़ें माटी हैं, लम्हे हीरे के थे...
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नज़र के ठीक सामने शाम का सूरज डूब रहा था. गज़ब की कशिश होती है डूबते सूरज की भी. वैसे डूबना अगर सलीके से आ जाये तो हर डूबने की कशिश लाज़वाब...
Friday, December 25, 2015
कहानियों वाला आसमान
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लड़की को कहानियां सुनना पसंद था, लड़के को कहानियां कहना। वो जब मिलते तो कहानियों का एक संसार खुलता। लड़के की किस्सागोई गज़ब थी, लड़की की कहा...
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Thursday, December 24, 2015
मस्तानी तो दीवानी थी लेकिन...
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एक स्त्री द्वारा दूसरी स्त्री को अकेलेपन और दुखी होने के अभिशाप देने के साथ फिल्म न खुलती तो संजय लीला भंसाली के दिव्य, विराट प्रेम क...
Tuesday, December 22, 2015
आप इसकी हड्डी तोड़ दीजिये...
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(पैरेंट टीचर मीटिंग ) दृश्य-एक पिता (गुस्से में फुफकारते हुए )- 'मैम आप इसकी हड्डी तोड़ दीजिये। दिमाग ख़राब है. २० में से १२ नंब...
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