प्रतिभा की दुनिया ...
Tuesday, August 25, 2015

वापस लौटना मुझे अच्छा नहीं लगता...

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लड़की बेसब्र होकर रास्तों को बाहों में समेट लेने को दौड़ पड़ती थी। जब रास्ते उसके हाथों से फिसल जाते तो उसके भीतर एक और ही इच्छा जागती,...
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Sunday, August 23, 2015

जिसको जैसी आंच मिली...

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किसी ने दाल पकाई किसी ने मुर्ग किसी ने देगची पर चढ़ाये शब्द जिसको जैसी आंच मिली उसकी वैसी बनी रसोई चैन से सोया था मजूर दाल खाकर ...
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Tuesday, August 18, 2015

विरक्ति भी एक अभ्यास है...

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Wednesday, July 29, 2015

'लव इस नॉट अ च्वाइस'

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डू यू लव मी ? अपनी देह के तमाम घाव बिसरा कर, रेंगकर सूख चुके खून की पपड़ियों के बीच बेहद विश्वास से भर कर वो उससे पूछती है. विश्वास, हाँ य...
Tuesday, July 28, 2015

चाय वाकई अच्छी है

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जिंदगी अपनी रफ़्तार से चलते-चलते दो कदम पीछे को लौटती है. मुस्कुराती है, निगाह भर देखती है खुला आसमान। उसमे बनने-बिगड़ने वाली आकृतियां। धा...
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Pratibha Katiyar
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