Tuesday, June 9, 2015
आकाश की मुठ्ठी खाली है...
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रात की कटोरी में झरती है चौदहवीं के चाँद की दूधिया फेनिल चांदनी ख्वाबों भरी पलकों को लुढ़का देती है तेरी बातूनी आँखें एक ये चांदनी ब...
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Monday, May 11, 2015
पीकू-कब्ज़ सिर्फ पेट का नहीं, जेहन का भी
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अमिताभ के कान्स्टीपेशन के लिए तमाम फार्मूले ढूंढते-ढूंढते फिल्म 'पीकू' हमारे दिमाग में कबसे जमी-जमाई, फंसी जड़ मान्यताओं को साफ ...
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Tuesday, May 5, 2015
ओ दाढ़ीवाले...
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ओ दाढ़ीवाले, जहाँ बता गए थे खड़े होने को उसी तरफ खड़ी हूँ तमाम अनसुनी आवाजों को थामे धूप और धूल के गुबार के बीच जिंदगी की सोंधी खुशबू ...
Sunday, May 3, 2015
इश्क़ मिज़ाजी भी, नियाज़ी भी....
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रात भर मिसरी की डली ज़ुबाँ पे घुलती रही सरकती रही नसों में दौड़ती-फिरती सदियों की कड़वाहट शीरीं एहसासों की तलाश में भटकती रही पलकें ख्वाबों ...
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Friday, April 24, 2015
आई डोंट एक्ससिस्ट स्टिल...
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कभी लगता है कि घर के आईने में जो रहता है वो कोई और ही है. देह में जो सांस है जाने किसकी है. गले में नाम की एक तख्ती लटकी थी जिससे कोई मु...
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