प्रतिभा की दुनिया ...
Wednesday, March 19, 2014

चूंकि मैं ये सवाल उठाता हूँ ....

›
वे चाँद पर जायेंगे और उससे भी आगे उन ऊंचाइयों तक जिन्हें दूरबीनें भी नहीं पकड़ सकतीं लेकिन ज़मीन पर आख़िरकार कब कोई भी भूखा नहीं होगा या...
Sunday, March 16, 2014

रंगों का घर बदलना, सांसों का जिंदगी बन जाना...

›
बहुत...बहुत...बहुत दिन हुए थे...दुनिया की हर चीज अपने ठिकाने पर धरे-धरे उकताने लगी थी। आसमान टंगे-टंगे, धरती घूमते-घूमते, बात बनते...
1 comment:
Monday, March 10, 2014

स्त्री के लिए एक कमरा....

›
वर्जीनिया वुल्फ के कमरे से बाहर आते हुए दूर-दूर तक कोई कमरा नजर नहीं आता। एक कमरा। एक स्त्री के लिए एक कमरा? कैसी अजीब सी बात लगती है...
2 comments:
Sunday, March 9, 2014

आईना आंख चुराता क्यों है...

›
जबसे पहनी है अपने होने की महक आईना आंख चुराता क्यों है... अभी-अभी वो लड़की मेरे पहलू से उठकर गयी है। उसकी खुशबू, उसकी सांसों में रची-बस...
Tuesday, March 4, 2014

लम्हा-लम्हा झरती तुम्हारी याद .…

›
सुनो, वो जो धनिया के बीज बोये थे न, जिनके उगने का कबसे इंतज़ार था, वो उग आये हैं. इस बार घर लौटा हूँ तो वो मुस्कुराते हुए मिले, जाने क...
3 comments:
‹
›
Home
View web version
My photo
Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
View my complete profile
Powered by Blogger.