Tuesday, November 27, 2012
जिंदगी की सलाखें बड़ी मजबूत हैं
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5 नवंबर दिन को पकड़ने को हाथ बढ़ाया तो शाम के आंचल का कोना ही हाथ लगा. वो भी जल्दी ही सरक गया...सर्द गहराती रातों को आने की बड़ी जल्दी ...
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Thursday, November 22, 2012
जिंदगी की शराब में अवसाद के टुकड़े
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4 नवंबर 2012 हमने देखी है चिनारों से पिघलती हुई बर्फ उनके शाने से ढलते हुए आंचल की तरह... एक साथी ने ये पंक्तियां पकड़ा दी थीं नि...
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Tuesday, November 20, 2012
कुछ बदलियाँ हथेलियों पर
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4 नवंबर 2012 कई बरस पुरानी अपनी ही बात रास्ते भर याद आती रही. हिल सिकनेस के चलते पहाड़ों पर कैसा गुस्सा फूटा था शिमला जाते वक्त. नह...
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Monday, November 19, 2012
फिर-फिर प्यार तुम्हीं से....
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4 नवंबर 2012 उदासियों की चादर ताने मौन के तकिये पर सर टिकाये एक टुकड़ा नींद की अभिलाषा लिए न जाने कितने युग बीत चले थे. कभी करवटें बद...
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Saturday, October 27, 2012
आकाश से टकराती खिलखिलाहटें
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मासूम खिलखिलाहटों के एक रेले ने जिस मजबूती से मुझे अचानक आ पकड़ा था कि व्यक्तित्व में समाई शाश्वत उदासियां भी भाग खड़ी हुईं. कैसा अजूब...
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