Wednesday, July 25, 2012
कहानी- बोनसाई
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जब तुम नहीं थीं, तब मैं तुम्हारा होना चाहता था. एक साया सा दाखिल होता था ख्यालों में. उसका कोई चेहरा नहीं होता था. लेकिन उस अनजाने साये...
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Sunday, July 15, 2012
आयत...
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मेरे कानों में कुछ गिरने की आवाजें थीं..सफ़र के दौरान क्या गिरा होगा भला. चौंक के देखती हूँ आस पास. सब सलामत है. ट्रेन अपनी गति से चल रही...
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Thursday, July 12, 2012
कितना कम जानते हैं हम ज़िंदगी को...
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'बच्चों की आवाज व अनुभवों को कक्षा में अभिव्यक्ति नहीं मिलती. प्रायः केवल शिक्षक का स्वर ही सुनाई देता है. बच्चे केवल अध्यापक के सव...
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Friday, July 6, 2012
ज़िन्दगी अगर अल्फाज़ होती
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हर यात्रा के बाद हम वापस मुडते हैं. वापस अपने ठीहे पर लौटने के लिए. हमारे लौटने की टिकट कनफर्म हो, न हो. तारीख तय हो, न हो लेकिन हमारे क...
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Friday, June 22, 2012
सौन्दर्य
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जबसे समझ लिया सौन्दर्य का असल रूप तबसे उतार फेंके जेवरात सारे न रहा चाव, सजने सवरने का न प्रशंसाओं की दरकार ही रही नदी के आईने में ...
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