Monday, February 28, 2011
नींद भी, फूल भी, तनहाई भी...
›
आधी रात को न जाने किसने दरवाजा खटकाया था. नींद से लड़की का कोई पुराना बैर था, सो पहली ही आहट में आवाज सुन ली थी. दरवाजा खोला तो हंसी ही ...
14 comments:
Wednesday, February 23, 2011
खाली खाली सा बसंत...
›
यह मेरा उदास बसंत है. पेड़ों से जब पत्ते झरते हैं, तो लगता है कि मेरा मन भी झर रहा है. तो क्या किसी नई शुरुआत के लिए ऐसा हो रहा है. क्योंक...
7 comments:
Monday, February 21, 2011
कितना दुर्लभ है एकांत...
›
मेरा जीवन बहुत बुरी तरह चल रहा है. मैं लोगों से घिरी हूं. बहुत सारे लोगों से. कुछ भी लिख पाने में असमर्थ हूं. एक बूंद एकांत को तरस रही हूं...
6 comments:
Thursday, February 17, 2011
मुझे प्यार नहीं चाहिए
›
तुमने मुझे याद किया. मुझे बेहद खुशी हुई. कितना अच्छा है यह अहसास कि हम अपना श्रेष्ठतम यानी अपना मन दूसरे को देते हैं. उसे, जो हमें अच्छा ल...
8 comments:
Tuesday, February 15, 2011
डायरीनुमा कुछ अगड़म-बगड़म
›
नब्ज कुछ देर से थमी सी है.. . इन दिनों आसपास ढेर सारे ख्याल घूमते रहते हैं. अजीबो-गरीब से. यूं कुछ न कुछ ख्याल तो हमेशा ही साथ होते हैं...
6 comments:
‹
›
Home
View web version