Friday, June 11, 2010
हाय मैंने गहने क्यों पहने
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सीरियलों के संसार में से लापतागंज के अलावा न आना इस देश मेरी लाडो ही मेरे हिस्से आता है. कारण ये भी हैं कि घर पहुंचने पर इन्हीं का वक्त होत...
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Thursday, June 3, 2010
हमारी सांसों में आज तक वो हिना की खुशबू महक रही है..
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आज अपने ब्लॉग पर पहला ऑडियो दे रही हूँ. इस सुरीले आगाज़ के लिए नूरजहाँ की आवाज से बेहतर भला क्या होगा... हमारी सांसों में आज तक वो हिन...
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Tuesday, June 1, 2010
क़ातिल को दुआ दी जाये
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जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाये तिश्नगी कुछ तो बुझे तिश्नालब-ए-ग़म की इक नदी दर्द के शहरों में बहा...
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Monday, May 24, 2010
जिंदगी दो पल की...
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फिल्म समीक्षा लिखना मेरा काम नहीं लेकिन पढ़ती जरूर हूं. पढऩे के बाद अक्सर इस नतीजे पर पहुंचती हूं कि अगर रिव्यू फिल्म को हिट बता रहे हैं तो...
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Thursday, May 20, 2010
नदी किनारे प्रेम
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मौसम कुछ ज्यादा ही मेहरबान था. हवायें इठला-इठलाकर चल रही थीं. सूरज नदी में उतर रहा था, आहिस्ता-आहिस्ता. लड़का खुश था. लड़की भी खुश थी. द...
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