Sunday, April 25, 2010
तुम कोई रस्म निभाने के लिए मत आना
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अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना सिर्फ एहसान जताने के लिए मत आना। मैंने पलकों पे तमन्नाएँ सजा रखी हैं, दिल में उम्मीद की सौ शम्मे जला रखी...
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Tuesday, April 6, 2010
मगर उससे मुहब्बत है, तो है
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वो नहीं मेरा मगर उससे मुहब्बत है तो है ये अगर रस्मों, रिवाज़ों से बग़ावत है तो है सच को मैंने सच कहा, जब कह दिया तो कह दिया अब ज़माने की नज़...
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Friday, April 2, 2010
जब नहीं आये थे तुम...
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जब नहीं आये थे तुम तब भी तो तुम आये थे... आंख में नूर की और दिल में लहू की सूरत याद की तरह धड़कते हुये दिल की सूरत तुम नहीं आये अभी फिर भी...
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Saturday, March 27, 2010
रेनर मरिया रिल्के की कविता- निष्ठा
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मेरी आंखें निकाल दो फिर भी मैं तुम्हें देख लूंगा मेरे कानों में सीसा उड़ेल दो पर तुम्हारी आवाज़ मुझ तक पहुंचेगी पगहीन मैं तुम तक प...
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Saturday, March 20, 2010
बाबुल जिया मोरा घबराये
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बाबुल जिया मोरा घबराये बिन बोले रहा न जाये बाबुल जिया मोरा घबराये... बाबुल मेरी इतनी अरज सुन लीजो मोहे सुनार के घर न दीजो मोहे $जेवर क...
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